Devraha Baba Death Anniversary: साधना के शिखर पर विराजमान थे देवराहा बाबा

Devraha Baba Death Anniversary 2025: देवराहा बाबा को देश-विदेश में एक अद्वितीय गुरु के रूप में सम्मान प्राप्त है. उनके दिव्य दर्शन, स्पर्श और आशीर्वाद से असंख्य लोगों के जीवन में चमत्कारी रूप से सकारात्मक बदलाव आए. हालांकि 19 जून 1990 को योगिनी एकादशी के दिन उन्होंने वृंदावन में यमुना तट पर समाधि ली थी, फिर भी उनके भक्त आज भी यह दृढ़ विश्वास रखते हैं कि बाबा सूक्ष्म रूप में सदैव उनके साथ उपस्थित हैं.

पुण्यतिथि 19 जून विशेष

डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

 Devraha Baba Death Anniversary: भारतवर्ष, जो कि आध्यात्म, तपस्या और साधना की भूमि रहा है, उसमें एक-से-एक महान संत, महात्मा और साधक हुए हैं जिन्होंने अपने तप और जीवन मूल्यों से समाज को दिशा दी. ऐसे ही विलक्षण और पूजनीय संतों में एक हैं देवराहा बाबा, जिन्हें संतों का संत यानी ‘महासंत’ कहा जाता है.

दिव्य उपस्थिति और चमत्कारी प्रभाव

देवराहा बाबा को देश-विदेश में एक अप्रतिम गुरु के रूप में जाना जाता है, जिनके दर्शन, स्पर्श और आशीर्वाद से अनगिनत लोगों ने अपने जीवन में चमत्कारी सकारात्मक परिवर्तन अनुभव किए. यद्यपि 19 जून 1990 को योगिनी एकादशी के दिन बाबा ने वृंदावन में यमुना तट पर समाधि ली, फिर भी भक्तों का विश्वास है कि वे आज भी सूक्ष्म रूप में अपने भक्तों के साथ हैं.

उनके प्रमुख शिष्यों में देवदास जी और रामसेवक दास जी को उन्होंने दिव्य ज्ञान से अभिसिंचित किया. देवराहा बाबा भारतीय संस्कृति का सजीव स्वरूप थे—करुणा, ममता और कल्याण के प्रतीक. उनकी वाणी मंत्रवत प्रभाव छोड़ती थी और हर व्यक्ति के हृदय को छू जाती थी.

अष्टांग योग में निपुण और विलक्षण संत

अष्टांग योग में पारंगत देवराहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे, जिनके लिए मन की बात जानना सहज था. उनका आश्रम आज भी देवरिया जिले की बरहज तहसील के मइल गांव में सरयू नदी के किनारे स्थित है. यह भी मान्यता है कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनेगा, जो उनकी समाधि के 33 वर्षों बाद साकार हुआ. उन्हें आचार्य रामानुज के बाद ग्यारहवां ऐसा महामानव संन्यासी माना जाता है जिन्होंने आध्यात्मिक चेतना से जनकल्याण किया.

तपस्वी जीवन और दिव्य व्यवहार

देवराहा बाबा का जीवन सादगी और कठोर तप का उदाहरण था. उन्होंने कभी किसी वाहन का उपयोग नहीं किया और न ही किसी भवन में निवास किया. वे पेड़ों के बीच या चार खंभों वाले मचान पर निवास करते थे. कहा जाता है कि उन्होंने कभी अन्न का सेवन नहीं किया और दूध, शहद तथा श्रीफल का रस ही उनका प्रिय आहार था. उनका कहना था कि गौ सेवा मनुष्य का प्रमुख धर्म है और गौ माता के प्रति उन्होंने विशेष भक्ति प्रकट की.

वैश्विक ख्याति और राष्ट्रपुरुषों से संबंध

उनकी ख्याति ऐसी थी कि ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम भी उनके दर्शन हेतु आये थे. डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीय, जयप्रकाश नारायण, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे राष्ट्रपुरुषों ने भी उनसे आशीर्वाद लिया. देवराहा बाबा का संदेश था कि ईश्वर के दर्शन प्रेम से होते हैं, और वे चमत्कारों के दिखावे से दूर रहते थे. वे मानते थे कि प्रकृति ही सबसे बड़ा औषधालय है, और वे धूप, मिट्टी, जल और वायु के माध्यम से लोगों का उपचार करते थे.

जन्म और साधना का आरंभ

उनकी जन्मतिथि और आयु आज भी रहस्य हैं. कुछ मानते हैं कि वे 200 वर्ष तक जीवित रहे, तो कुछ 800-900 वर्ष भी बताते हैं. उनका मूल नाम जनार्दन दत्त दुबे था और देवरिया क्षेत्र में साधना करने के कारण उन्हें देवराहा बाबा कहा गया. बाल्यकाल में ही दिव्य अनुभूति होने के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और साधना-पथ पर चल पड़े. बाद में ब्रजभूमि, मथुरा में उन्होंने यमुना तट पर कठोर योग-साधना की.

यह भी मान्यता है कि बाबा खेचरी मुद्रा जैसे कठिन योग सिद्ध कर चुके थे, जिससे वे भूख, मृत्यु और शरीर की सीमाओं को नियंत्रित कर पाने में सक्षम थे

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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