Chhath Puja 2025: छठ पूजा में हर नियम और परंपरा का गहरा आध्यात्मिक महत्व माना गया है. उन्हीं परंपराओं में एक है मिट्टी के चूल्हे का इस्तेमाल. व्रती इसी चूल्हे पर शुद्धता के साथ प्रसाद बनाते हैं, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है.
क्या है धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि छठ पूजा में मिट्टी का चूल्हा प्रकृति और पवित्रता का प्रतीक होता है. चूल्हा मिट्टी से बनता है जिस धरती पर हम जीवन जीते हैं और जो भोजन उगाती है. इसी धरती का सम्मान करने के लिए व्रती मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद पकाते हैं.
आम की लकड़ी का किया जाता है इस्तेमाल
छठ पूजा में व्रती घर में सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हैं. मिट्टी का चूल्हा नया बनाकर ही उपयोग किया जाता है ताकि पूजा शुद्धता के साथ हो. साथ ही प्रसाद बनाने में सिर्फ गंगाजल, आम की लकड़ी और पीपल के पत्तों का ही इस्तेमाल किया जाता है.
इसलिए नहीं बनता इलेक्ट्रिक चूल्हे पर प्रसाद
कहा जाता है कि मिट्टी के चूल्हे पर बना प्रसाद सूर्य देव सीधा स्वीकार करते हैं और इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि गैस या इलेक्ट्रिक चूल्हे पर बना प्रसाद पूरी तरह शुद्ध नहीं माना जाता. छठ पूजा में सूर्य देव को प्रकृति और ऊर्जा का स्रोत माना गया है. मिट्टी का चूल्हा प्रकृति की गोद से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है.
खरना का शुभ मुहूर्त
आज खरना पूजा के दिन व्रती महिलाएं सूर्यास्त के बाद यानी शाम 5:41 बजे के बाद खरना पूजन और प्रसाद अर्पण कर सकती हैं. इस समय पूजा करने से सूर्य देव और छठी मैया की कृपा प्राप्त होती है.
क्या छठ पूजा में गैस चूल्हा इस्तेमाल किया जा सकता है?
गैस चूल्हे पर बना प्रसाद पूर्ण रूप से पवित्र नहीं माना जाता. इसलिए व्रती मिट्टी के नए चूल्हे का ही उपयोग करते हैं.
मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाते समय किन चीज़ों का उपयोग किया जाता है?
गंगाजल, आम की लकड़ी और पीपल के पत्तों का उपयोग किया जाता है ताकि प्रसाद सात्विक और शुद्ध रहे.
छठ पूजा में मिट्टी के चूल्हे का पर्यावरण से क्या संबंध है?
यह परंपरा धरती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश देती है और पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को बढ़ावा देती है.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है.
