Chandra Dosh: जब किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित होता है, तो उसका स्वास्थ्य अक्सर ठीक नहीं रहता. वह एक के बाद एक किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त रहता है. एक बीमारी ठीक होते-होते दूसरी समस्या सामने आ जाती है. ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित होता है, उन्हें अनिद्रा, कफ संबंधी रोग, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, अजीर्ण, सर्दी-ज़ुकाम, बुखार, गठिया, मानसिक असंतुलन, पेट की बीमारियां और जल से जुड़े कष्टों का सामना करना पड़ता है. इसके साथ ही ऐसे लोगों को जानवरों के हमले का भी भय बना रहता है.
पीड़ित चंद्रमा के दुष्प्रभाव
- मानसिक तनाव, डर और बेचैनी
- निर्णय लेने की क्षमता कमजोर
- रिश्तों में परेशानियां और धोखा
- नींद की कमी और बुरे सपने
- दुर्घटनाएं और चोट लगने का योग
- जल तत्व से जुड़ी समस्याएं
वैदिक जप मंत्र
ॐ इमं देवा ऽअसपत्नर्ट. सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय।
इमममुष्यै पुत्रममुस्यै विष एष वोऽमीराजा सोमोऽस्माकंब्राह्मणानार्ट. राजा।।
तांत्रिक मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं सोमाय नम:
अधि देवता- उमा
प्रत्यधि देवता-अप्
जप संख्या-11 हजार
कलियुग में जप संख्या- 44 हजार
अग्निकोण, चतुरस्र मण्डल, अंगुल 4, यमुना तटवर्ती देश, अत्रि गोत्र, श्वेत वर्ण। कर्क राशि का स्वामी।
वाहन- हरिण
समिधा – पलास
कुंडली में चंद्रमा को ठीक करने के लिए इन चीजों का करें दान
मोती, चांदी, चावल, मिश्री, दही, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, बांस की डलिया, सफेद बैल तथा सफेद चन्दन।
दान का समय- सोमवार को प्रदोष (संध्या) काल
धारण रत्न- मोती 4-5 रत्ती
नोट- अगर आप मोती धारण नहीं कर पा रहे है, तो उसके अभाव में उपरत्न भी धारण कर सकते हैं. जैसे-गोदन्ती या चन्द्रकान्त मणि धारण करें या चंद्रमा का यंत्र तथा खिरनी की जड़ को सफेद वस्त्र में बांधकर बाहु या गले में धारण करें.
व्यवसायिक पदार्थ- जल से संबंधित व्यवसाय, कांच के बने सामान
चंद्रमा की पीड़ा से बचने के लिए करें व्रत-उपवास
चंद्रमा की पीड़ा से बचने के लिए सोमवार का व्रत करें या 32 पूर्णिमा का व्रत करना करें. शिव जी की उपासना करें. चंद्रमा को श्वेत पदार्थ, श्वेत पुष्प चढ़ावें. सफेद वस्तुओं का दान करें.
Also Read: सूर्य की पीड़ा से होती हैं ये 10 गंभीर बीमारियां, जानिए असरदार इलाज और रामबाण उपाय
