Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन महानवमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की पूजा से सभी प्रकार की सिद्धियां और सफलता प्राप्त होती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री ने भगवान शिव को भी सिद्धियां प्रदान की थीं, जिसके बाद वे अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रकट हुए.
मां सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य माना जाता है. वे कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और उनके चार हाथ होते हैं. उनके हाथों में गदा, चक्र, शंख और कमल होता है. उनका वाहन सिंह माना जाता है.
मां सिद्धिदात्री को लगाएं इन चीजों का भोग
महानवमी के दिन मां को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं. मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी, चना, खीर और नारियल का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है. इसके साथ ही आप ताजे फल भी अर्पित कर सकते हैं.
प्रिय रंग
मां सिद्धिदात्री का प्रिय रंग बैंगनी या गुलाबी माना जाता है, जो आध्यात्मिकता और शांति का प्रतीक है. ऐसे में माता की आराधना के समय बैंगनी या गुलाबी रंग के कपड़े अवश्य धारण करें. कहा जाता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं.
प्रिय फूल
मां को कमल और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. कमल का फूल पवित्रता, सुंदरता और ज्ञान का प्रतीक है. कहा जाता है कि इसे अर्पित करने से भक्त के जीवन में खुशहाली आती है.
मां सिद्धिदात्री के मंत्र
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
ॐ ह्रीं सः सर्वार्थसिद्धिदात्र्यै स्वाहा।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तुते॥
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता।
तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।।
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम।
जब भी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।।
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है।
तू जगदंबे दाती, तू सर्वसिद्धि है।।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।।
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे।
कभी काम उसके रहें न अधूरे।।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया,
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।।
सर्व सिद्धि दाती, वह है भाग्यशाली,
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा,
महानंदा मंदिर में है वास तेरा।।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता,
वंदना है सवाली, तू जिसकी दाता।।
