Gemstone Astrology: नीलम पहनने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कुंडली की इन स्थितियों में मिलता है लाभ

अगर आप नीलम रत्न पहनने की सोच रहे हैं, तो पहले इसके नियम जान लें. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, कुंडली में शनि की स्थिति देखकर ही नीलम धारण करना चाहिए. जानें किन लोगों को इसे पहनने की सलाह दी जाती है और नीलम धारण करने की सही विधि क्या है.

Gemstone Astrology: नीलम शनि ग्रह का रत्न है और इसे नौ प्रमुख रत्नों में शामिल किया जाता है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, नीलम बहुत ही प्रभावशाली रत्न है और इसका असर जल्दी दिखाई दे सकता है. इसलिए इसे धारण करने से पहले कुंडली में शनि की स्थिति को समझना जरूरी है. हर व्यक्ति के लिए नीलम उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है. कुंडली में शनि किस भाव में है, वह किस लग्न के लिए शुभ फल दे रहा है और दूसरे ग्रहों के साथ उसका कैसा संबंध है, इन बातों के आधार पर नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है. गलत तरीके या बिना कुंडली की जांच किए रत्न पहनने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं किन लोगों को नीलम पहनना चाहिए, इससे क्या लाभ मिल सकते हैं और इसे धारण करने के क्या नियम हैं.

नीलम रत्न (AI Image)

नीलम रत्न किस ग्रह का है?

नीलम शनि ग्रह का रत्न है. ज्योतिष में शनि को कर्म, न्याय, अनुशासन, मेहनत और जिम्मेदारी से जुड़ा ग्रह माना जाता है. नीलम को कई जगह 'ज्ञान रत्न' के नाम से भी जाना जाता है.

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, नीलम का प्रभाव तेज होता है. इसलिए इसे धारण करने से पहले कुंडली में शनि की स्थिति की जांच करना जरूरी है.

नीलम किसे पहनना चाहिए?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि शुभ स्थिति में हो, वे नीलम धारण कर सकते हैं. कुंडली में शनि चौथे, पांचवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में स्थित हो, तो भी नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है.

इसके अलावा, अगर शनि अपनी स्थिति से छठे या आठवें भाव से संबंधित हो या शनि वक्री, अस्त अथवा कमजोर स्थिति में रहते हुए किसी शुभ भाव को देख रहा हो, तो भी कुंडली का विश्लेषण करके नीलम धारण किया जा सकता है.

नीलम रत्न इन्फोग्राफिक (AI Image)

किन लग्न वालों के लिए नीलम शुभ है?

  • वृषभ लग्न: शनि नवम और दशम भाव का स्वामी होने के कारण योगकारक ग्रह माना जाता है. इसलिए वृषभ लग्न वालों के लिए नीलम शुभ बताया गया है.
  • मिथुन लग्न: शनि अष्टम और नवम भाव का स्वामी होता है. शनि की महादशा में कुंडली देखकर नीलम धारण किया जा सकता है.
  • कन्या लग्न: शनि पंचम और छठे भाव का स्वामी होता है. इस लग्न में विशेष परिस्थितियों में, खासकर शनि की महादशा में नीलम धारण किया जा सकता है.
  • तुला लग्न: शनि चौथे और पांचवें भाव का स्वामी होता है. शुक्र और शनि के बीच मित्रता होने के कारण तुला लग्न वालों के लिए नीलम को शुभ बताया गया है.
  • मकर लग्न: शनि इस लग्न का स्वामी है. इसलिए मकर लग्न वालों के लिए नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है.
  • कुंभ लग्न: शनि लग्न और बारहवें भाव का स्वामी होता है. लग्नेश होने के कारण कुंभ लग्न में नीलम को लाभकारी बताया गया है.

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नीलम पहनने से क्या फायदे होते हैं?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, कुंडली में नीलम अनुकूल होने पर यह करियर, कारोबार और आर्थिक स्थिति से जुड़े मामलों में लाभकारी हो सकता है. इसे पहनने से आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ने के साथ मानसिक शांति मिलने की बात भी कही गई है.

नीलम को नौकरी, व्यवसाय, न्याय और कानून से जुड़े काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी बताया गया है. इसके अलावा, शनि की साढ़ेसाती के दौरान भी कुंडली की स्थिति देखकर नीलम धारण किया जा सकता है.

शनि की साढ़ेसाती में नीलम पहन सकते हैं?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती के दौरान भी कुंडली की स्थिति देखकर नीलम धारण किया जा सकता है. चंद्र राशि से शनि के बारहवें, पहले और दूसरे भाव से गुजरने की अवधि को साढ़ेसाती कहा जाता है. इसकी कुल अवधि लगभग साढ़े सात वर्ष होती है.

अगर किसी व्यक्ति के लिए साढ़ेसाती अधिक कष्टकारी हो, तो कुंडली का विश्लेषण करने के बाद नीलम धारण करने की सलाह दी जा सकती है.

नीलम किस उंगली में पहनना चाहिए?

नीलम को दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में धारण किया जाता है. मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है.

नीलम किस धातु में पहनना चाहिए?

नीलम को पंचधातु या चांदी की अंगूठी में धारण करने की सलाह दी जाती है. इसे अंगूठी या पेंडेंट के रूप में भी पहना जा सकता है.

नीलम किस दिन पहनना चाहिए?

नीलम को शनिवार के दिन धारण करने की सलाह दी जाती है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इसे शनिवार को सूर्यास्त से करीब दो घंटे पहले मध्यमा उंगली में धारण किया जा सकता है.

नीलम धारण करने की विधि

नीलम रत्न (AI Image)
  1. शनिवार के दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें.
  2. नीलम को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें.
  3. इसे साफ कपड़े पर रखकर शनिदेव का ध्यान करें.
  4. नीलम को पंचधातु या चांदी की अंगूठी में जड़वाएं.
  5. 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें.
  6. इसके बाद नीलम को दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करें.

नीलम पहनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

नीलम प्रभावशाली रत्न है, इसलिए इसे बिना कुंडली की जांच किए नहीं पहनना चाहिए. अगर पहले से कोई दूसरा रत्न पहना हुआ है, तो नीलम के साथ उसकी अनुकूलता भी देखनी चाहिए. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, नीलम के साथ माणिक और मूंगा धारण करने से बचना चाहिए. रत्न पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से कुंडली का विश्लेषण कराना बेहतर रहता है.

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लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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