Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी आज, जानें विद्या और ज्ञान की देवी की आराधना का शुभ मुहूर्त

Basant Panchami 2026: आज विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां शारदे की पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ की जायेगी. शहर के सभी शैक्षणिक संस्थानों, हॉस्टलों व अपार्टमेंट्स में इसकी भव्य तैयारियां की गयी हैं. मां सरस्वती ज्ञान और विवेक की अधिष्ठात्री देवी हैं, और इसी ज्ञान की आभा हमारे शहर के कई युवाओं में दिखायी देती है.

Basant Panchami 2026: आज बसंत पंचती है. आज के दिन मां सरस्वती अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की उपासना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. विशेष रूप से शिक्षा और ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है.

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

शुभ मुहूर्त सुबह 7:13 से दोपहर 2:33 बजे तक

वसंत पंचमी उत्साह, उमंग और नवचेतना का पर्व है, जो नये जीवन की शुरुआत का प्रतीक है. वाराणसी पंचांग में माघ शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ रात 1 बजकर 18 मिनट से हो चुकी है. यह तिथि आज 23 जनवरी की रात 12 बजे तक रहेगी. वहीं, मिथिला-भैदेही पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 22- 23 जनवरी की रात 1 बजकर 31 मिनट से 24 जनवरी की रात 12 बजकर 21 मिनट तक मानी जायेगी. उदयातिथि के अनुसार आज 23 जनवरी को ही वसंत पंचमी पर्व मनाना सर्वमान्य है. सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. दोपहर 11:40 बजे से 12:28 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो सरस्वती पूजा के लिए विशेष शुभ और फलदायी माना गया है. स्थान परिवर्तन के अनुसार समय में कुछ अंतर संभव है.

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पूजा, विद्यारंभ है विशेष फलदायी

पंचमी का पर्व आज 23 जनवरी, शुक्रवार मनाया जायेगा. वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है, इस दिन विद्या की आराध्य देवी मां सरस्वती की पूजा होती है, जो ज्ञान, वाणी और कला की देवी मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवती सरस्वती का अवतरण हुआ था. देवी सरस्वती को ब्रह्मा की मानस पुत्री माना गया है, जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि प्रदान करती हैं.

वसंत ऋतु का स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व

पंचांग के अनुसार छह ऋतुएं होती हैं, जिनमें बसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है. यह ऋतु फूलों के खिलने और नयी फसल के आने का पर्व है. इस मौसम में सरसों के पीले फूल, आमों के मंजर और चारों ओर हरियाली से वातावरण खुशनुमा हो जाता है. वसंत ऋतु का आध्यात्मिक के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व है. इस ऋतु के आगमन से मानव, पशु और पक्षियों में नयी चेतना का संचार होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए इस दिन सरस्वती पूजा मनायी जाती है.

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लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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