Basant Panchami 2026 Visarjan: मां सरस्वती की मूर्ति का सही विसर्जन और पूजा विधि

Basant Panchami 2026 Visarjan: मां सरस्वती की मूर्ति विसर्जन का शुभ मुहूर्त, आसान विधि और पूजा का सही तरीका जानें, जिससे विद्या और सुख-शांति बनी रहे.

Basant Panchami 2026 Visarjan: बसंत पंचमी कल यानी 23 जनवरी 2026 को मनाई गई. इस दिन लोग अपने घरों में मां सरस्वती की प्रतिमा या उनका चित्र स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व होता है. इसके बाद अगले दिन इनकी विसर्जन करके विदाई कर देंगे, लेकिन क्या बसंत पंचमी के अगले दिन मां सरस्वती का विसर्जन करना सही है? आइए इसके बारे में विस्तार से

सरस्वती मूर्ति विसर्जन की सही विधि

अंतिम पूजा करें

  • मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र के सामने धूप, दीप, फूल और भोग अर्पित करें.
  • अपने पिछले कृत्यों की गलतियों के लिए क्षमा मांगें.

कलश का जल छिड़कें

  • पूजा के कलश को हल्का हिलाकर उसका जल पूरे घर में छिड़कें.
  • इससे घर में विद्या, सुख और शांति बनी रहती है.

मूर्ति को तैयार करें

  • मूर्ति को साफ कपड़े में लपेटें.
  • इसे पवित्र नदी, तालाब या किसी जलाशय में प्रवाहित करें.

यदि नदी पास न हो

  • घर में बड़े बर्तन में जल भरकर मूर्ति विसर्जित कर सकते हैं.

मंत्र जाप और विदाई

  • विसर्जन के समय मंत्र जाप करें: ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
  • मन में मां से विदाई की प्रार्थना करें.

सरस्वती मूर्ति विसर्जन का महत्व

हिंदू परंपरा में किसी भी मूर्ति की स्थापना के बाद उसका विसर्जन करना आवश्यक माना जाता है. बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के बाद अगले दिन, यानी षष्ठी तिथि को विसर्जन करने की परंपरा है. इसका कारण यह है कि पूजा का समय सीमित होता है. मूर्ति को लंबे समय तक घर में रखने से उसकी ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है. अगले दिन विसर्जन करने से मां की कृपा स्थायी रूप से घर में बनी रहती है और पूजा का विधिपूर्ण समापन होता है.

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
15+ वर्षों का अनुभव | ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
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Published by: Shaurya Punj

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