आशीष ध्यानी, पंडा, बद्रीनाथ धाम
Badrinath Temple: मान्यता है कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं. हालांकि पंचांग के अनुसार तारीख एक-दो दिन आगे-पीछे हो सकती है. इस साल भक्त 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर सकेंगे.
कपाट खुलने की पूरी प्रक्रिया
कपाट खुलने का समय बहुत खास और धार्मिक महत्व वाला होता है. सुबह करीब 4 बजे मुख्य पुजारी (रावल जी), धर्माधिकारी और हक-हकूकधारी मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे पर पहुंचते हैं. इस दौरान टिहरी राजघराने के प्रतिनिधि और प्रशासन भी मौजूद रहते हैं. सबसे पहले कपाट पर लगी सील और ताले की जांच की जाती है, फिर पूरे विधि-विधान से द्वार खोले जाते हैं. जैसे ही कपाट खुलते हैं, भक्तों को भगवान के “निर्वाण दर्शन” होते हैं, जो बेहद खास माने जाते हैं.
घृत कंबल और विशेष पूजा का महत्व
कपाट खुलते ही सबसे पहले भगवान पर चढ़ा “घृत कंबल” हटाया जाता है. यह ऊनी कंबल घी में डुबोकर शीतकाल में भगवान को ओढ़ाया जाता है. इसके बाद विशेष पूजा की जाती है, जिसमें तिल के तेल से भगवान का महाभिषेक होता है. यह तेल टिहरी राजघराने से आता है और इसे बड़ी श्रद्धा से तैयार किया जाता है.
‘गाडू घड़ा’ की अनोखी परंपरा
टिहरी राजघराने की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए हाथ से तिल का तेल निकालती हैं. इस पवित्र तेल को “गाडू घड़ा” कहा जाता है. यह कलश यात्रा के रूप में ऋषिकेश, श्रीनगर और जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ पहुंचता है. सर्दियों में जब बद्रीनाथ के कपाट बंद रहते हैं, तब भगवान की पूजा नृसिंह मंदिर में की जाती है.
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बद्रीनाथ कैसे पहुंचें
आज के समय में बद्रीनाथ पहुंचना काफी आसान हो गया है. आप हवाई, रेल और सड़क तीनों रास्तों से यहां जा सकते हैं.
हवाई मार्ग
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो यहां से लगभग 317 किमी दूर है. यहां से टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं.
रेल मार्ग
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो करीब 297 किमी दूर है. आगे का सफर सड़क से तय करना होता है.
सड़क मार्ग
बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर स्थित है. उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें ऋषिकेश से नियमित चलती हैं. इसके अलावा हरिद्वार, देहरादून और दिल्ली से भी बस और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है.
