Akshaya Tritiya 2026: पंचांग गणना के अनुसार वर्ष 2026 में तृतीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार को दोपहर 1:01 बजे से प्रारंभ होकर 20 अप्रैल, सोमवार को प्रातः 10:40 बजे तक रहेगी. इस प्रकार यह तिथि दोनों दिनों को स्पर्श करती है. धर्मशास्त्रों में युगादि तिथियों के निर्धारण में उदयकालीन तिथि को विशेष महत्व दिया गया है. 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी और पूर्वाह्न तक बनी रहेगी, इसलिए शास्त्रों के अनुसार इसी दिन अक्षय तृतीया मनाना अधिक उचित माना गया है. यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा तथा दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. साथ ही, यह अबूझ मुहूर्त होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश और खरीदारी जैसे मांगलिक कार्य पूरे दिन किए जा सकते हैं.
दान-पुण्य का विशेष महत्व
अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य का महत्व अत्यधिक बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, दान और पुण्य कर्मों का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए इसे “अक्षय” कहा गया है. इस दिन विशेष रूप से स्नान-दान का महत्व होता है. जल, गुड़, सत्तू, वस्त्र और अन्न का दान करने से व्यक्ति के संचित पापों का नाश होता है. यह भी मान्यता है कि इस दिन दान करने से धन में कमी नहीं आती, बल्कि धन-संपदा में वृद्धि होती है. पितरों के निमित्त किए गए कर्म भी इस दिन अक्षय फल प्रदान करते हैं, जिससे कुल में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
सोना-चांदी में निवेश का महत्व
अक्षय तृतीया पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है. वैदिक मान्यताओं के अनुसार स्वर्ण केवल धातु नहीं, बल्कि माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. चूंकि यह तिथि अक्षय फल देने वाली है, इसलिए इस दिन खरीदी गई वस्तुएं कभी क्षय नहीं होतीं, ऐसा विश्वास है. इस दिन संपत्ति, निवेश, भूमि या भवन से जुड़े कार्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. सोना-चांदी खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना या धन का संचय करना इस दिन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश निरंतर वृद्धि और स्थिरता प्रदान करता है.
अक्षय तृतीया के शुभ योग
इस वर्ष अक्षय तृतीया के दिन कई विशेष ज्योतिषीय योग बन रहे हैं, जो इसे और भी शुभ बनाते हैं.
सूर्य और चंद्रमा उच्च राशि में: इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित रहेंगे, जो अत्यंत दुर्लभ और शुभ स्थिति मानी जाती है.
रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि योग
सोमवार को रोहिणी नक्षत्र (सुबह 7:28 बजे तक) के प्रभाव से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. यह योग मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है और किसी भी कार्य को कई गुना अधिक फलदायी बनाता है.
गजकेसरी योग का निर्माण
गुरु (बृहस्पति) और चंद्रमा के वृष राशि में गोचर से गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है. यह योग सुख, समृद्धि और ज्ञान में वृद्धि करने वाला माना जाता है.
बन रहा है मालव्य राजयोग
शुक्र के अपनी ही राशि वृष में स्थित होने से मालव्य राजयोग बन रहा है, जो भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-धान्य में वृद्धि का कारक है.
अक्षय तृतीया पूजन विधि
अक्षय तृतीया का पर्व भगवान विष्णु के लक्ष्मी-नारायण स्वरूप और कुबेर देव को समर्पित है. इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है.
स्नान के बाद हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें. इसके पश्चात भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा को पीले पुष्प, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें. भगवान को सत्तू, ककड़ी, अक्षत, चने की दाल और फलों का भोग लगाएं.
इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें. अक्षय फल की प्राप्ति के लिए विशेष मंत्र—
“अक्षय्यफलप्राप्त्यर्थ लक्ष्मीपुण्यजनाधिपम्.
सपुत्रं सगणं चैव पूजयामि यथाविधि॥”
का भी जप किया जा सकता है.
यदि समय हो, तो महालक्ष्मी बीज मंत्र का जप करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इस प्रकार विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है.
ज्योतिर्विद डॉ. श्रीपति त्रिपाठी
