Akshaya Tritiya 2026:अक्षय तृतीया हिंदू धर्म की अत्यंत शुभ और पवित्र तिथियों में से एक मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था, इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहा जाता है. यह तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्त मानी जाती है, यानी किसी भी शुभ कार्य को बिना पंचांग देखे इस दिन शुरू किया जा सकता है. धार्मिक ग्रंथों में इसे अत्यंत पुण्यदायिनी तिथि बताया गया है.
अक्षय तृतीया की पौराणिक मान्यताएं और अवतार
पंडित बितुन पांडे बताते हैं कि पुराणों के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है. इसी दिन भगवान हयग्रीव ने मधु-कैटभ राक्षसों से वेदों को मुक्त कराकर ब्रह्मा जी को पुनः सौंपा था. इसके साथ ही नर-नारायण का अवतार भी इसी तिथि को हुआ माना जाता है. जैन धर्म में भी इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी ने इसी दिन अपनी कठोर तपस्या पूर्ण की थी.
अक्षय तृतीया पूजा, व्रत और धार्मिक परंपराएं
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है. उन्हें चंदन, श्वेत वस्त्र और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं. इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. बद्रीनाथ धाम के कपाट भी इसी शुभ तिथि पर खोले जाते हैं, और वृंदावन में बांके बिहारी जी के दर्शन भी वर्ष में केवल इसी दिन विशेष रूप से होते हैं.
अक्षय तृतीया पर स्नान, दान और पुण्य फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है. इसके बाद भगवान का पूजन, मंत्र-जप, हवन और पितरों का तर्पण करना अत्यंत फलदायी माना गया है. विशेष रूप से इस दिन दान का बहुत महत्व है. जल से भरे पात्र, अन्न, वस्त्र, घी, स्वर्ण, छाता, जूते आदि का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
अक्षय तृतीया पर दान की महिमा और कथाएं
महर्षि व्यास के अनुसार, जलदान से अक्षय कीर्ति, स्वर्णदान से इच्छाओं की पूर्ति, घी या औषधि के दान से स्वास्थ्य लाभ, छाता या जूते के दान से संकटों से रक्षा, गोदान से अमृतत्व और अन्नदान से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, देवराज इंद्र ने देवगुरु बृहस्पति के निर्देश पर इस व्रत का पालन किया और सभी पापों से मुक्त हो गए. वहीं धर्मदास नामक वैश्य ने भी इस व्रत का पालन कर अगले जन्म में राजत्व प्राप्त किया.
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अक्षय तृतीया पर सावधानी और आचरण
अक्षय तृतीया के दिन किए गए शुभ और अशुभ कर्मों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है. इसलिए इस दिन विशेष रूप से मन, वचन और कर्म से किसी भी प्रकार के पाप से बचना चाहिए. अच्छे कर्म, दान और भक्ति से जीवन में सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है.
अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पुण्य, आस्था और सत्कर्मों का प्रतीक है. इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल कभी नष्ट नहीं होता, इसलिए इसे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने वाला दिन माना गया है.
पंडित बितुन पांडे
(12 सालों का अनुभव)
रांची
