अच्छे विचारों के बीज के लिए मन की जमीन तैयार करें

एक किसान बीज बोने निकला. जब वह बुवाई कर रहा था तो कुछ बीज राह के किनारे जा पड़े. चिड़िया आयीं और उन्हें चुग गयीं. थोड़े बीज चट्टानी जमीन पर जा गिरे. वहां मिट्टी बहुत उथली थी, बीज तुरंत उगे. लेकिन वहां मिट्टी तो गहरी थी नहीं इसलिए जब सूरज चढ़ा तो वे पौधे झुलस […]

एक किसान बीज बोने निकला. जब वह बुवाई कर रहा था तो कुछ बीज राह के किनारे जा पड़े. चिड़िया आयीं और उन्हें चुग गयीं. थोड़े बीज चट्टानी जमीन पर जा गिरे. वहां मिट्टी बहुत उथली थी, बीज तुरंत उगे. लेकिन वहां मिट्टी तो गहरी थी नहीं इसलिए जब सूरज चढ़ा तो वे पौधे झुलस गये. क्योंकि उन्होंने ज्यादा जड़ें तो पकड़ी नहीं थीं इसलिए वे सूख कर गिर गये. बीजों का एक हिस्सा कंटीली झाड़ियों में जा गिरा, झाड़ियां बड़ी हुईं और उन्होंने उन पौधों को दबोच लिया.
मगर थोड़े से बीज जो अच्छी जमीन पर गिरे थे, अच्छी फसल देने लगे. जितना बोया गयी था, उससे कोई तीस गुना, साठ गुना या सौ गुना से भी ज्यादा फसल हुई. यह दृष्टांत बाइबल का है. इसके जरिये यीशु ने अपने समझाया है कि सुसंदेश ग्रहण करने के लिए पहले अपने मन की जमीन को भी तैयार करना पड़ता है.

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