भारत के डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म UPI और RuPay को लेकर अमेरिका सवाल उठा रहा है, हालांकि, यह विवाद केवल भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका ने अपनी व्यापारिक रिपोर्ट में ब्राजील के Pix, चीन के UnionPay, वियतनाम के NAPAS, तुर्किये के Troy और इंडोनेशिया समेत कई देशों की घरेलू डिजिटल पेमेंट प्रणालियों और उनसे जुड़ी नीतियों पर भी आपत्तियां दर्ज की हैं.
ऐसे में सवाल यह है कि आखिर अमेरिका को दूसरे देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनसे जुड़ी नीतियों पर आपत्ति क्यों है?
सबसे पहले समझिए पूरा विवाद है क्या
दरअसल, पिछले एक दशक में दुनिया भर में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ा है. पहले डिजिटल लेनदेन के लिए मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क और पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल होता था, जिन पर अमेरिकी कंपनियों Visa और Mastercard का दबदबा था. लेकिन अब भारत, ब्राज़ील, चीन, वियतनाम, तुर्किये और इंडोनेशिया समेत कई देशों ने अपने घरेलू डिजिटल भुगतान नेटवर्क विकसित किए हैं.
इसका मकसद सिर्फ डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना भी है. इनके जरिए सरकार लेनदेन की लागत घटाने, भुगतान को तेज और सुरक्षित बनाने तथा देश के भीतर होने वाले ट्रांजैक्शन को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस करने की कोशिश करती हैं. यही वजह है कि UPI, RuPay, Pix, UnionPay, NAPAS और Troy जैसे नेटवर्क कम लागत और फास्ट पेमेंट के लिए तैयार किए गए हैं.
यहीं से विवाद की शुरुआत होती है
दूसरे देशों के डिजिटल पेमेंट से अमेरिका को क्यों हो रही दिक्कत
- अमेरिका की चिंता किसी एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम से नहीं, बल्कि उन नीतियों से है जो घरेलू पेमेंट नेटवर्क को बढ़ावा देते हैं.
- आसान शब्दों में कहें तो अमेरिका चाहता है कि Visa, Mastercard, PayPal और अन्य विदेशी भुगतान कंपनियों को भी वही अवसर और बाजार तक पहुंच मिले जो घरेलू भुगतान नेटवर्क को मिलती है. तभी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा (Level Playing Field) सुनिश्चित हो सकेगी.
- अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) का कहना है कि अगर कोई देश स्थानीय भुगतान नेटवर्क को सरकारी प्रोत्साहन देता है, उसे प्राथमिकता देता है या ऐसे नियम लागू करता है जिनसे विदेशी कंपनियों की बाजार तक पहुंच सीमित होती है, तो इसे व्यापारिक बाधा (Trade Barrier) माना जा सकता है.
- इसी वजह से अमेरिका ने भारत के UPI और RuPay के साथ-साथ ब्राजील के Pix, चीन के UnionPay, वियतनाम के NAPAS, तुर्किये के Troy और इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जुड़ी नीतियों पर भी अपनी व्यापारिक रिपोर्टों में सवाल उठाए हैं.
- यानी अमेरिका की आपत्ति केवल किसी एक देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम से नहीं, बल्कि उन नीतियों से है जिन्हें वह विदेशी कंपनियों के लिए व्यापारिक बाधा मानता है.
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भारत के UPI और RuPay पर अमेरिका को क्या आपत्ति है?
भारत का UPI और RuPay आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट का हिस्सा है. हर महीने UPI के जरिए अरबों रुपये का लेनदेन होता है. चाय की टपरी से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह लोग UPI से भुगतान करने लगे हैं. इसी बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अमेरिका ने कुछ सवाल उठाए हैं.
सरकार का समर्थन
UPI भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा संचालित होता है. इसे RBI और दूसरे बैंकों का समर्थन भी मिला है. अमेरिका का कहना है कि सरकार के इस समर्थन से UPI को फायदा मिलता है और विदेशी कंपनियों के लिए मुकाबला करना मुश्किल हो गया है.
RuPay को बढ़ावा
अमेरिका का कहना है कि भारत सरकार की कुछ योजनाओं में RuPay कार्ड को ज्यादा बढ़ावा दिया गया। इससे Visa और Mastercard जैसी विदेशी कंपनियों को नुकसान हो सकता है.
UPI पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं
भारत में UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर ज्यादातर मामलों में दुकानदारों को कोई अतिरिक्त शुल्क (MDR) नहीं देना पड़ता।.
- पेमेंट टैक्स नहीं देने के कारण भारत के बाजारों में लेनदेन के लिए UPI और RuPay डेबिट कार्ड का चलन बढ़ा है. जबकि Visa और Mastercard जैसी कंपनियां इसी पेमेंट टैक्स से कमाई करती हैं. इसलिए अमेरिका का मानना है कि इससे विदेशी कंपनियों के लिए कंपटीशन टफ हो गया है
- हालांकि, भारत सरकार इन आरोपों से सहमत नहीं है। सरकार का कहना है कि UPI और RuPay किसी विदेशी कंपनी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बनाए गए। इनका मकसद आम भारतीय लोगों के लिए डिजिटल भुगतान को सस्ता, आसान और सुरक्षित बनाना है.
- सरकार का यह भी कहना है कि UPI की वजह से करोड़ों लोग पहली बार डिजिटल पेमेंट से जुड़े हैं. साथ ही, छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी इसका बड़ा फायदा मिला है.
ब्राजील के Pix पर क्यों उठाए अमेरिका ने सवाल ?
- ब्राजील ने 2020 में Pix नाम का डिजिटल पेमेंट सिस्टम शुरू किया था. कुछ ही सालों में यह वहां का सबसे लोकप्रिय पेमेंट तरीका बन गया.
- Pix की खास बातें हैं कि कुछ ही सेकंड में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं, आम लोगों के लिए इसका इस्तेमाल लगभग मुफ्त है, 24 घंटे, सातों दिन सेवा उपलब्ध रहती है और इसे ब्राजील का केंद्रीय बैंक चलाता है.
- यहीं अमेरिका को आपत्ति है. उसका कहना है कि जब केंद्रीय बैंक ही सिस्टम का मालिक भी हो, उसे चलाए भी और उसके नियम भी बनाए, तो विदेशी कंपनियों के लिए बराबरी का मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है।
- वहीं ब्राजील का कहना है कि Pix का उद्देश्य लोगों को तेज, सस्ता और आसान डिजिटल भुगतान देना है, न कि विदेशी कंपनियों को बाहर करना.
चीन के UnionPay को लेकर विवाद क्या है?
- UnionPay चीन का सबसे बड़ा कार्ड पेमेंट नेटवर्क है.
- अमेरिका का आरोप है कि चीन ने कई सालों तक अपने घरेलू बाजार में UnionPay को ज्यादा बढ़ावा दिया जिसका नतीजा हुआ कि Visa व Mastercard जैसी विदेशी कंपनियों के लिए वहां कारोबार करना आसान नहीं रहा.
- अमेरिका का मानना है कि इससे विदेशी कंपनियां चीन के बड़े भुगतान बाजार में बराबरी से काम नहीं कर पाईं.
- दूसरी ओर, चीन का कहना है कि UnionPay को मजबूत करना उसकी आर्थिक और वित्तीय नीति का हिस्सा था। उसका दावा है कि अब विदेशी कंपनियों के लिए भी बाजार पहले की तुलना में ज्यादा खुला है.
डिजिटल पेमेंट नहीं डेटा है असली कारण !
- जानकारों का कहना है कि नहीं. विवाद सिर्फ UPI, RuPay, Pix या UnionPay जैसे पेमेंट सिस्टम तक सीमित नहीं है. इसके पीछे डिजिटल अर्थव्यवस्था, डेटा और भविष्य की तकनीक से जुड़ी बड़ी प्रतिस्पर्धा भी है.
- दरअसल, आज डिजिटल पेमेंट सिर्फ पैसे भेजने और लेने का जरिया नहीं रह गया है. जब कोई व्यक्ति ऑनलाइन पेमेंट करता है, तो उससे जुड़ा डेटा भी तैयार होता है. जो बताता है कि लोग कहां खरीदारी कर रहे हैं, कितना खर्च कर रहे हैं और किस तरह की सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह जानकारी फिनटेक कंपनियों, बैंकों और दूसरी डिजिटल सेवाओं के लिए काफी अहम होती है.
- इसलिए दुनिया के कई देश अपने खुद के डिजिटल भुगतान नेटवर्क विकसित कर रहे हैं. ताकी भुगतान व्यवस्था देश के भीतर ही संचालित हो, लेनदेन की लागत कम हो, विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटे और देश अपने डिजिटल डेटा और वित्तीय व्यवस्था पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सके.
यानी यह विवाद सिर्फ इस बात का नहीं है कि लोग किस ऐप या कार्ड से भुगतान करते हैं. असली मुद्दा यह है कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर किसका ज्यादा प्रभाव होगा, किसके पास ज्यादा डेटा होगा और डिजिटल भुगतान के बढ़ते बाजार में किसकी भूमिका ज्यादा मजबूत होगी.
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