बिश्नोई गैंग क्यों है सलमान खान से नाराज, लाॅरेंस क्यों बना जान का दुश्मन?

सलमान खान के करीबी मित्र बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद से इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या सलमान खान की सुरक्षा सवालों के घेरे में है और लाॅरेंस बिश्नोई उन्हें अपना निशाना बना सकता है? सलमान खान और लाॅरेंस बिश्नोई के बीच दुश्मनी की वजह काला हिरण का शिकार है, जिसके लिए कोर्ट ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई. बिश्नोई समाज का काले हिरण से क्या है संबंध है और क्यों लाॅरेंस बिश्नोई सलमान खान का दुश्मन बन बैठा है, इसपर फोकस्ड यह आलेख पढ़ें

Salman Khan : बिश्नोई गैंग एक बार फिर चर्चा में है, वजह है एनसीपी नेता और सलमान खान के करीबी रहे बाबा सिद्दीकी की शनिवार रात हुई हत्या. बाबा सिद्दीकी की सलमान खान से गहरी दोस्ती थी और इसी दोस्ती को उनकी हत्या की वजह भी बताया जा रहा है. लाॅरेंस बिश्नोई ग्रुप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर हत्या की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि बाबा सिद्दीकी और सलमान की दोस्ती की वजह से ही उनकी हत्या की गई है और जो कोई भी सलमान की मदद करेगा, उसका यही हश्र होगा. बिश्नोई समाज से संबंध रखने वाले लाॅरेंस बिश्नोई ने सलमान खान के पीछे अपने गुर्गों को लगा रखा है और वे लगातार उन्हें जान से मारने की धमकी देते हैं. बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद सलमान खान की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उन्होंने अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं.

सलमान खान और लाॅरेंस बिश्नोई के बीच क्या है दुश्मनी

सलमान खान और लाॅरेंस बिश्नोई के बीच दुश्मनी की शुरुआत 1998 में हुई थी, जब यह सूचना सामने आई थी कि मूवी हम साथ-साथ हैं कि शूटिंग के दौरान सलमान खान ने दो काले हिरण का शिकार किया था. काले हिरण का शिकार प्रतिबंधित है और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी. इस केस में सलमान खान को 5 साल की सजा हुई है, लेकिन फिलहाल वे जमानत पर हैं. बिश्नोई समाज काले हिरण की पूजा करता है और जब दो काले हिरण मारे गए थे तो लाॅरेंस बिश्नोई ने सलमान खान से माफी मांगने को कहा था, लेकिन सलमान खान ने माफी नहीं मांगी थी, जिसके बाद से लाॅरेंस बिश्नोई उनकी जान का दुश्मन बन गया है और खुलेआम सलमान खान को जान से मारने की धमकी देता रहा है. कई बार इस ग्रुप ने सलमान खान के परिवार को धमकी भी दी है और उनके घर पर हमला भी करवाया है. कुछ समय पहले सलमान खान के पिता सलीम खान को भी धमकी दी गई थी. इसके अलावा भी कई बार सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग, घर में आग लगना जैसी घटनाएं हो चुकी हैं.

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बाबा सिद्दीकी और सलमान खान की दोस्ती

बाबा सिद्दीकी और सलमान खान की दोस्ती कैसे हुई, इसके बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन इनकी दोस्ती बाॅलीवुड में काफी चर्चित थी. सलमान खान को जब भी मदद की जरूरत होती थी बाबा सिद्दीकी वहां खड़े होते थे. काला हिरण मामले में भी बाबा सिद्दीकी ने उनकी काफी मदद की थी. बाॅलीवुड के बड़े स्टार्स उनके यहां आते-जाते थे. उनकी इफ्तार पार्टी की चर्चा हमेशा होती रहती थी. बाबा सिद्दीकी का जन्म तो बिहार के पटना शहर में हुआ था, लेकिन उन्होंने मुंबई में ही अपना पूरा जीवन बिताया. मुंबई उनकी कर्मभूमि थी. उनके पैतृक निवास बिहार के गोपालगंज जिले में है.

कौन हैं बिश्नोई समाज के लोग

बिश्नोई समाज राजस्थान का प्रकृति प्रेमी समाज है. यह ओबीसी कैटेगरी में आता है. यह राजस्थान के जोधपुर, नागौर, बीकानेर और जैसलमेर जिले में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी इनकी आबादी है. 18वीं शताब्दी में जोधपुर के राजा के आदेश के खिलाफ 84 गांवों के लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण गंवा दिए थे, जिसके बाद राजा ने पूरे इलाके में पेड़ों की रक्षा का आदेश दिया था. साथ ही वन्य जीवों की रक्षा का भी संकल्प लिया था. इसे बिश्नोई मूवमेंट के नाम से भी जाना जाता है. इस आंदोलन में 350 से अधिक लोग मारे गए थे. इन्होंने राजा के आदेश के खिलाफ पेड़ों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपक कर उसके संरक्षण की कोशिश की थी. उनका कहना था कि पेड़ों से हमें जीवन मिलता है इसलिए इनकी रक्षा होनी चाहिए. बिश्नोई समाज को पर्यावरण संरक्षण के रूप में देखा जाता है. इस समाज में प्रकृति की रक्षा के लिए कई नियम भी हैं, जिनका वे सख्ती से पालन करते हैं, जिनमें वन्य जीवों की रक्षा भी शामिल है.

कौन है लाॅरेंस बिश्नोई

लाॅरेंस बिश्नोई का संबंध बिश्नोई समाज से है, लेकिन वह एक गैंगस्टर है और उसने अपराध जगत में अपना कदम पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही रखा था जब उसकी मुलाकात एक अन्य गैंगस्टर गोल्डी बरार से हुई थी. उसपर लोगों को धमकाने, जबरन वसूली और हत्या के कई मामले दर्ज हैं. उसे आतंकवादी घोषित किया जा चुका है और फिलहाल वह तिहाड़ जेल में है. उसके गैंग में 700 से अधिक लोग हैं, जिनमे से सैकड़ों लोग शाॅर्प शूटर हैं. काला हिरण केस के बाद लाॅरेंस बिश्नोई ने कोर्ट परिसर में यह कहा था कि वह सलमान खान को जोधपुर में मार डालेगा. उसके बाद से अबतक उसने इसके लिए काफी कोशिश की है और धमकी भी दी है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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