क्या है PM Shri योजना, जिसे लेकर आमने-सामने हैं केंद्र और ममता दी के साथ ये राज्य सरकारें

PM Shri Scheme : झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक आदित्य रंजन ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में बताया कि झारखंड ने भी एमओयू साइन किया है. लेकिन झारखंड दूसरे फेज में शामिल है, इसलिए यहां अभी सिर्फ विद्यालयों को चिह्नित करने का काम हुआ है. कुल 381 स्कूलों को चिह्नित किया जा चुका है, लेकिन अभी फडिंग का कोई काम नहीं हुआ है.

PM Shri Scheme : पीएम श्री योजना यानी  (Prime Minister School for Rising India ) केंद्र सरकार की एक ऐसी योजना जिसके तहत देश भर के 14,500 पुराने स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा. पीएम श्री योजना का लक्ष्य स्कूली शिक्षा को अपग्रेड करना है ताकि बच्चों को हाई क्वालिटी की शिक्षा दी जा सके और वे इस तरह ट्रेंड हों कि 21 सदी की चुनौतियों से भलीभांति निपट सकें.

पीएम श्री योजना के तहत बच्चों को स्मार्ट क्लास की सुविधा दी जाएगी, उन्हें नई तकनीकों से अवगत कराया जाएगा, स्कूल में कक्षाएं बनाई जाएंगी, बेंच-डेस्क लगाएं जाएंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर की वो तमाम चीजें उपलब्ध कराई जाएंगी, जो एक स्कूल में बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए जरूरी हैं.

2022 में शुरू हुई है पीएम श्री योजना

5 सितंबर को पीएम मोदी ने किया था ये ट्वीट

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 सितंबर 2022 को शिक्षक दिवस के मौके पर इस योजना की शुरुआत की थी. उन्होंने बताया था कि इस योजना के तहत देश के 14,500 स्कूलों का अपग्रेडेशन किया जाएगा. यह स्कूल पूरी तरह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ही काम करेंगे. यह योजना पांच साल के लिए होगी और इस योजना पर जो खर्च आएगा उसका 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी. इस योजना के तहत पांच साल की अवधि के लिए कुल बजट 27360 करोड़ का होगा और योजना का उद्देश्य 21 सदी की तकनीक से बच्चों का संपूर्णता में विकास करना होगा.

राज्य द्वारा संचालित स्कूलों का हो रहा है चयन

पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

पीएम श्री योजना का जब शुभारंभ हुआ, उस वक्त राज्य सरकारों को एक एमओयू केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साथ साइन करना था, ताकि इस योजना को राज्यों में लागू किया जा सके.  अधिकतर राज्यों ने एमओयू साइन करने में ज्यादा देरी नहीं की, लेकिन बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु, केरल और दिल्ली इस एमओयू को साइन करना नहीं चाहते थे और उन्होंने इसके लिए पहल नहीं की.

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इसकी वजह यह थी कि केंद्र सरकार, राज्यों द्वारा संचालित स्कूलों का चयन इस योजना के तहत कर रही है और जिस स्कूल का चयन इस योजना के तहत हो जाता है उसका नाम पीएम श्री योजना के तहत रख दिया जाएगा. मसलन अगर कोई स्कूल है जैसे राजकीय मध्य विद्यालय तो उसका नाम हो जाएगा पीएम श्री राजकीय मध्य विद्यालय. योजना के तहत केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय का भी चयन किया जा रहा है.

खर्च की भागीदारी 60-40 को लेकर है विवाद

राज्य और केंद्र में है खर्च को लेकर विवाद

इस योजना में 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारों को करना है, लेकिन योजना संचालित करने का श्रेय पूरी तरह केंद्र सरकार को जा रहा है, यही वजह है कि कुछ राज्य इस योजना को अपने प्रदेश में लागू करने से मना कर रहे हैं. लेकिन जब केंद्र ने सख्त रुख अपनाया और फंडिंग रोकने की बात की तो तमिलनाडु और केरल ने तो एमओयू पर साइन कर दिया, लेकिन बंगाल, पंजाब और दिल्ली अड़े रहे. इन तीनों ही राज्यों में विपक्षी दलों की सरकार है, परिणाम यह हुआ है कि केंद्र ने इन राज्यों में स्कूली शिक्षा के लिए व्यापक कार्यक्रम की फंडिंग रोक दी है. इससे केंद्र और इन तीन राज्यों के बीच विवाद जारी है.

झारखंड ने एमओयू साइन करने में देरी की

झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक आदित्य रंजन ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में बताया कि झारखंड ने भी एमओयू साइन किया है. लेकिन झारखंड दूसरे फेज में शामिल है, इसलिए यहां अभी सिर्फ विद्यालयों को चिह्नित करने का काम हुआ है. इसके आगे कुछ भी काम नहीं हुआ है. कुल 381 स्कूलों को चिह्नित किया जा चुका है,  लेकिन अभी फडिंग का कोई काम नहीं हुआ है.

आदित्य रंजन ने बताया कि पीएम श्री योजना को लेकर झारखंड से कोई विवाद तो नहीं हुआ है, लेकिन एमओयू साइन करने में कुछ विलंब जरूर हुआ था. बंगाल सरकार का पक्ष जानने के लिए हमने कई बार बंगाल शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी मनीष जैन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन ना तो उन्होंने मैसेज का जवाब दिया और ना ही फोन उठाया.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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