तेज प्रताप यादव से पहले भारतीय राजनीति के ये प्रेम संबंध और विवाह भी बने हाॅटकेक

Tej Pratap Yadav : प्रेम करना गुनाह नहीं है, लेकिन अगर दो लोगों का प्रेम किसी के लिए परेशानी की वजह बन जाए, तो उसपर समाज आपत्ति करता है. कुछ इसी तरह का मामला अभी सामने आया है, जब पूर्व राजद नेता तेज प्रताप यादव ने अनुष्का यादव के साथ अपने संबंधों का खुलासा किया है. तेज प्रताप यादव पहले से शादीशुदा हैं, इसलिए उनकी पत्नी ऐश्वर्या ने सवाल पूछा है कि आखिर उनकी जिंदगी क्यों खराब की गई. कुल सार यह है कि तेज प्रताप का संबंध अभी चर्चा में है. भारतीय राजनीति में इससे पहले भी कई विवाह और प्रेम संबंध बने हैं, जो चर्चा के केंद्र में रहे हैं.

Tej Pratap Yadav : लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, अनुष्का यादव के साथ अपने प्रेम संबंधों के कारण चर्चा में हैं और इसी संबंध की वजह से उन्हें पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया गया है. तेज प्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय भी सामने आ गई हैं और उन्होंने यह बयान दिया है कि अगर तेज प्रताप का संबंध किसी दूसरी लड़की से था, तो फिर मुझसे शादी क्यों की और मेरा जीवन क्यों खराब किया. तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय का संबंध विवादों में रहा है और इनके तलाक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है. तेज प्रताप यादव के प्रेम संबंध के सामने आने के बाद राजनीति भी तेज हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. चूंकि बिहार विधानसभा चुनाव इसी वर्ष होने हैं, इसलिए भी तेज प्रताप यादव के प्रेम संबंध उजागर होने पर राजद सुप्रीमो लालू यादव नाराज हैं, क्योंकि इसका असर चुनाव में दिख सकता है. ऐसा नहीं है कि भारतीय राजनीति में इस तरह का प्रेम संबंध पहली बार उजागर हुआ है, इसके पहले भी कई ऐसे संबंध और विवाह सामने आए हैं, जिसपर खूब चर्चाएं हुई हैं.

भारतीय राजनीति के चर्चित प्रेम प्रसंग और विवाह

भारतीय राजनीतिक घराने में कई ऐसे प्रेम संबंध बने जिनकी खूब चर्चा हुई और कुछ ऐसे संबंध भी बने, जिनकी चर्चा तो ज्यादा नहीं हुई है, लेकिन वे संबंध बहुत प्रगाढ़ थे. ऐसे ही संबंधों में से एक है सोनिया गांधी और राजीव गांधी का प्रेम संबंध. राजीव गांधी और सोनिया गांधी एक साथ इंग्लैंड के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे, जहां उनकी मुलाकात हुई और प्रेम के बाद 1968 में इनकी शादी दिल्ली में इंदिरा गांधी के आवास पर हुई थी. चूंकि इंदिरा गांधी की बहू एक विदेशी महिला थीं, इसलिए इस शादी की खूब चर्चा उस समय हुई थी. इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी की शादी भी खासा चर्चा में रही थी, क्योंकि मेनका एक फैशन माॅडल थीं. संजय और मेनका गांधी की शादी तो 1974 में चौंकाने वाले अंदाज में हो गई, लेकिन इस शादी से कई विवाद जुड़े. संजय की मौत के बाद इंदिरा गांधी ने मेनका गांधी को घर से निकाल दिया और वे अपने अबोध बच्चे के साथ सड़क पर थीं, ऐसी चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारे में खूब हुईं.

संजय गांधी और रुखसाना सुल्तान का संबंध

इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी के आसपास रहने वालों की लिस्ट में जगदीश टाइटलर, कमलनाथ, सज्जन कुमार जैसे नाम थे, उनमें से एक नाम रुखसाना सुल्तान का भी था, जो संजय गांधी की चौकड़ी की अकेली महिला सदस्य थीं. रुखसाना सुल्तान को संजय गांधी ने इमरजेंसी के दौरान नसबंदी करवाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. रुखसाना सुल्तान का औरा इतना मजबूत था कि कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता उसके सामने नतमस्तक थे. कहा जाता है कि संजय गांधी के साथ उनके करीबी संबंध कई बार मेनका गांधी और इंदिरा गांधी के साथ विवाद की वजह भी बने. रुखसान सुल्ताना के कद के बारे में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने अपनी किताब 24 अकबर रोड में लिखा है कि उनका इतना बड़ा हो गया था कि कांग्रेसी उनके आगे-पीछे करते थे. रुखसाना और संजय गांधी की मुलाकात एक कार्यक्रम में हुई थी, बाद में रुखसाना ने एक आर्मी आफिसर से शादी कर ली थी. बाॅलीवुड एक्ट्रेस अमृता सिंह इसी रुखसाना सुल्ताना की बेटी हैं.

नारायण दत्त तिवारी और उज्जवला शर्मा

कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी के उज्जवला शर्मा से संबंध तब उजागर हुए थे जब 2008 में एक युवक रोहित शेखर ने सामने आकर यह कहा था कि नारायण दत्त तिवारी उनके जैविक पिता हैं. हालांकि शुरुआत में नारायण दत्त तिवारी अपने संबंधों से इनकार करते रहे, लेकिन डीएनए टेस्ट के बाद यह साबित हो गया था कि रोहित शेखर नारायण दत्त तिवारी के ही पुत्र हैं. यह मामला कोर्ट तक गया था और अंतत: नारायण दत्त तिवारी से रोहित शेखर को अपना पुत्र मान लिया था.

जाॅर्ज फर्नांडिस और जया जेटली

समता पार्टी के संस्थापक और पूर्व रक्षा मंत्री जाॅर्ज फर्नांडिस की शादी लैला कबीर से हुई थी. बाद में इनदोनों का अलगाव हो गया और जाॅर्ज फर्नांडिस के जीवन में जया जेटली की एंट्री हुई. जया जेटली के पति जाॅर्ज फर्नांडिस के विभाग में कार्यरत थे. जया जेटली के साथ जाॅर्ज के संबंधों की खूब चर्चाएं हुईं, बावजूद इसके जया ने जाॅर्ज का साथ नहीं छोड़ा. वे आजीवन उनके साथ रहीं और जब जाॅर्ज फर्नांडिस बहुत बीमार थे तब भी उनकी सेवा करती रहीं. जया जेटली और जाॅर्ज फर्नांडिस के संबंधों पर लैला कबीर ने बाद में आपत्ति जताया था, क्योंकि उनका तलाक आजीवन नहीं हुआ था.

शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर

कांग्रेस नेता शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर की शादी भी राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चित रही. वजह यह था कि दूल्हा और दुल्हन दोनों की ही यह तीसरी शादी थी. शशि थरूर की पहली शादी तिलोत्तमा मुखर्जी से हुई, बाद में उन्होंने एक विदेशी महिला क्रिस्टा गिल्स से शादी की. ये दोनों शादियां तलाक पर खत्म हुई और 2010 में शशि थरूर ने सुनंदा पुष्कर से तीसरी शादी की, लेकिन 2014 में उनकी संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई थी. शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर की शादी की खूब चर्चा देश में हुई थी.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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