Shefali Jariwala : ‘कांटा लगा गर्ल’ शेफाली जरीवाला के जीवन में थे ये तनाव, कहीं उसी वजह से तो नहीं हुई मौत?

Shefali Jariwala Death : शेफाली जरीवाला की मौत से देश में सनसनी फैल गई है. जो उनके प्रशंसक हैं वो और जो नहीं है वो भी एक 42 साल की अदाकारा के मौत पर स्तब्ध है. शेफाली की मौत नेचुरल थी या नहीं इसपर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इन सबके बीच इन सेलिब्रेटी के जीवन के एक पक्ष पर भी चर्चा होनी चाहिए जो काफी स्याह और चकाचौंध से दूर है.

Shefali Jariwala Death : 2002 में एक रीमेक साॅन्ग आया था कांटा लगा. इसकी दिलकश अदाकारा शेफाली जरीवाला की मौत हो गई है. मात्र 42 साल की उम्र में शेफाली जरीवाला की मौत हुई है. शुक्रवार रात उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डाॅक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डाॅक्टर्स का कहना कि जब शेफाली को अस्पताल लाया गया था, तो उसकी मौत हो चुकी थी. उसके शव का पोस्टमार्टम हो रहा है, जो कई सवाल खड़े करता है, हालांकि पुलिस ने अभी तक शेफाली जरीवाला की मौत पर स्पष्ट कुछ नहीं कहा है, लेकिन यह माना जा रहा है उनकी मौत के पीछे कुछ रहस्य छुपे हो सकते हैं.

शेफाली जरीवाला के जीवन में थीं कई परेशानियां

शेफाली जरीवाला की मौत क्यों और कैसे हुई, इसका सच कुछ समय बाद जरूर उजागर हो जाएगा, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि उनका जीवन सामान्य नहीं चल रहा था. शेफाली ने अपने इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें मिरगी की बीमारी थी जिससे उबरने के लिए उन्होंने अपने डाइट और लाइटस्टाइल पर काफी ध्यान दिया. अपनी बीमारी की वजह से शेफाली ने कई प्रोजेक्ट्‌स भी छोड़ दिए थे, इस बात को उन्होंने अपने इंटरव्यू में माना है. शेफाली की पहली शादी सिंगर गुरमीत सिंह से हुई थी, लेकिन इस शादी में उन्हें सिर्फ टाॅर्चर ही मिला. इस वजह से शादी के पांच साल बाद शेफाली ने तलाक ले लिया. 2014 में शेफाली ने पराग त्यागी से शादी की थी. पराग त्यागी और शेफाली के बीच उम्र का अच्छा-खासा फासला था, जिसकी वजह से शेफाली मां नहीं बन पा रहीं थीं और यह उनके जीवन में दुख का एक बड़ा कारण था.

माॅडल और एक्ट्रेस पर रहता है अपनी ब्यूटी को बनाकर रखने का प्रेशर

शेफाली जरीवाला

माॅडल और एक्ट्रेसेस पर इस बात का प्रेशर रहता है कि वो अपनी ब्यूटी और फिटनेस को बनाकर रखें. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें काम मिलना बंद हो जाता है और सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हो जाता है जिसमें उनकी बाॅडी शेमिंग की जाती है और उनके बारे में अनर्गल बातें भी जाती हैं, जो कहीं ना कहीं उन एक्ट्रेसेस पर प्रेशर क्रिएट करती हैं, जिसकी वजह से वे अपने आप को फिट रखने के लिए ना सिर्फ जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करती है, बल्कि कई तरह की दवाइयां और ड्रग्स का प्रयोग भी करती हैं. कई बार स्टेरॉयड, ड्रग्स या अत्यधिक कैफीन के प्रयोग से भी कार्डियक अरेस्ट की समस्या सामने आ जाती है. सिद्धार्थ शुक्ला, पुनीत राजकुमार, सिंगर केके, राज कौशल जैसे एक्टर भी कार्डिएक अरेस्ट का शिकार हो चुके हैं. एक्सपर्ट्‌स का मानना है कि अत्यधिक वर्कआउट, तनावपूर्ण जीवन और फिटनेस सप्लीमेंट का अत्यधिक प्रयोग भी हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट का कारण बनता है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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