अमेरिका में भी संविधान बचाने के लिए प्रदर्शन, जानिए क्यों लगे ‘नो किंग्स डे’ के नारे; ट्रंप को बताया तानाशाह

Presidents Day : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद से कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनकी वजह से पूरे देश में उनके खिलाफ माहौल बन रहा था और लोगों का गुस्सा प्रेसिडेंट डे के दिन फूट गया, जब लोग सड़कों पर उतरे और ट्रंप–मस्क के खिलाफ प्रदर्शन किया. अमेरिकियों ने ट्रंप को तानाशाह तक करार दिया.

Presidents Day : अमेरिका में प्रेसिडेंट डे पर छुट्टी रहती है और देशवासी अपने राष्ट्रपतियों को याद करके उनके कार्यों के लिए एक तरह से उनका शुक्रिया अदा करते हैं.  प्रेसिडेंट डे अमेरिका के राष्ट्रपतियों को समर्पित दिवस है, ऐसे में इस दिन अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आम जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, तो यह आश्चर्यजनक बात है. अमेरिका के इतिहास में प्रेसिडेंट डे के दिन इस तरह का विरोध प्रदर्शन कभी नहीं हुआ था.    

 प्रेसिडेंट डे पर डोनाल्ड ट्रंप का विरोध

अमेरिका में इस बार प्रेसिडेंट डे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जोरदार विरोध हुआ. अमेरिकियों ने प्रसिडेंट ट्रंप के खिलाफ किए गए विरोध को ‘नो किंग्स डे’ का नाम दिया. इस प्रदर्शन को 50501 मूवमेंट का नाम दिया गया है. इस मूवमेंट का अर्थ है 50 प्रदर्शन, 50 राज्य, 1 मूवमेंट. पीएनआर में छपी खबर के अनुसार अमेरिकी अपने राष्ट्रपति के असंवैधानिक कार्यों से नाराज हैं और वे अपने राष्ट्रपति को यह बताना चाहते हैं कि अमेरिका में लोकतंत्र की जगह राजतंत्र कायम नहीं किया जा सकता है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी एलन मस्क ने सत्ता को हथिया लिया है और वे देश में संघीय व्यवस्था और सरकार को खत्म करने में लगे हैं. प्रदर्शन के लिए आम लोगों ने राज्य की राजधानियों को चुना और वे वहां मस्क की कंपनी द्वारा निर्मित कार टेस्ला पर सवार होकर पहुंचे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रंप और मस्क के नेतृत्व में अब अमेरिका एक गंभीर देश नहीं रहा. प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप को हटाओ, मस्क को हटाओ जैसे नारे भी लगाए. प्रद़र्शनकारियों ने ट्रंप को तानाशाह बताया और कहा कि वे देशभक्त हैं, कायरों की तरह ट्रंप के आगे नहीं झुकेंगे.

अमेरिकियों में ट्रंप और मस्क को लेकर क्यों है नाराजगी

ट्रंप और मस्क से नाराज लोग सड़क पर उतरे

डोनाल्ड ट्रंप जबसे राष्ट्रपति बने हैं, उनकी नीतियां विवादों में आ गई हैं. उन्होंने अमेरिका फर्स्ट का नारा दिया और इसके लिए उन्होंने अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता को समाप्त करने की बात की. उन्होंने अप्रवासियों को वापस उनके देश भेजना शुरू किया. नौकरशाही पर लगाम कसने के लिए उन्होंने DOGE (Department of Government Efficiency ) की कमान अमेरिका के प्रमुख पूंजीपति एलन मस्क को सौंप दी है. एलन मस्क ने नौकरशाही पर लगाम कसने के लिए अबतक संघीय व्यवस्था के नौ हजार से अधिक लोगों की छुट्टी कर दी है. थर्ड जेंडर की पहचान खत्म करने और इस लिंग को मान्यता नहीं देने के फैसले से भी अमेरिकियों में नाराजगी है और वे इसे डोनाल्ड ट्रंप की तानाशाही मान रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क ने मिलकर कई एजेंसियों को भी बंद कर दिया, जिसकी वजह से उसमें काम करने वाले कई हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं और उनका परिवार भी इस निर्णय से प्रभावित हुआ है. प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में कांग्रेस से दखल देने की मांग की है. यही वजह है कि अमेरिकियों ने प्रेसिडेंट डे के दिन डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी एलन मस्क का विरोध किया.

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क्या है DOGE?

सरकारी दक्षता विभाग यानी Department of Government Efficiency का गठन डोनाल्ड ट्रंप ने किया है. यह विभाग एक आयोग की तरह काम कर रहा है और इसका अध्यक्ष एलन मस्क को बनाया गया है. इस सलाहकार संस्था का काम अमेरिका को नौकरशाही से मुक्ति दिलाना और खर्चों में कटौती करना है. डोगे का गठन कांग्रेस द्वारा नहीं हुआ है, यह राष्ट्रपति ट्रंप का एक कार्यकारी आदेश है.

अमेरिका में क्या है प्रेसिडेंट डे?

अमेरिका में प्रेसिडेंट डे एक उत्सव है. यह दिवस अमेरिका के दो महान राष्ट्रपतियों को समर्पित है. प्रेसिडेंट डे फरवरी माह के तीसरे सोमवार को प्रतिवर्ष मनाया जाता है. अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जाॅर्ज वाशिंगटन का जन्मदिन 22 फरवरी को मनाया जाता है, जबकि वहां के महान राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का जन्मदिन 12 फरवरी को मनाया जाता है. इन दोनों राष्ट्रपतियों को समर्पित यह दिवस अमेरिकियों के लिए गौरव दिवस है, जिस दिन वे अपने दो महान व्यक्तित्व को याद करते हैं, जिन्होंने देश के निर्माण में अहम योगदान दिया.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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