नीरो एक सनकी सम्राट, जिसने रात को रोशनी के लिए अपनी प्रजा को मशाल की तरह जिंदा जलाया

Nero Roman Emperor : रोम का ऐसा राजा, जिसने अपनी मां को मरवाया. खुद को महान कलाकार समझने वाला और प्रशंसा नहीं करने वालों की हत्या करवाने वाला सम्राट नीरो. नीरो के बारे में यह कहा जाता है कि वह इतना बड़ा अत्याचारी था कि उसने अपनी प्रजा को अपने सुख के लिए जिंदा जलवाया. अय्याश इतना बड़ा था कि दिन-रात शराब में डूबा रहता और लड़कियों से घिरा रहता. उस अत्याचारी नीरो का अंत कैसे हुआ क्या आप जानते हैं?

Nero Roman Emperor : “जब रोम जल रहा था, तो नीरो सुख और चैन की बांसुरी बजा रहा था”, यह कहावत बहुत आम है, जिसके बारे में आपने जरूर सुना होगा. दरअसल यह कहावत एक गैरजिम्मेदार राजा के बारे में कही गई है, जिसके राज्य में जब आग लगी थी तो वह अपने कर्तव्य निभाने की बजाय बांसुरी बजाने में व्यस्त था. उस राजा का नाम था नीरो क्लॉडियस सीजर ऑगस्टस जर्मनिकस (Nero Claudius Caesar Augustus Germanicus). रोम का यह सम्राट नीरो के नाम से विश्व इतिहास में प्रसिद्ध था और एक बेहद ही क्रूर शासक था, जिसने सत्ता के लिए अपनी मां की भी हत्या करवा दी थी.

कौन था नीरो, जिसे राजा बनवाने के लिए उसकी मां ने रची थी ये साजिश

नीरो का जन्म 37 ईसवी में रोम में हुआ था. वह जूलियो-क्लॉडियन वंश का चौथा और अंतिम शासक था. वह महज 16 साल में रोम का सम्राट बना था. उस काल में सत्ता की जंग बहुत आम थी और षडयंत्रों का दौर भी चलता रहता था. नीरो का जूलियस सीजर से रक्त संबंध नहीं था, लेकिन वह उनके वंश का शासक था. नीरो की मां एग्रीपिना जूलियस सीजर के बेटे ऑगस्टस की परपोती थी. एग्रीपिना के पति की मृत्यु तब हो गई थी जब नीरो महज तीन साल का था. नीरो की मां एग्रीपिना महत्वाकांक्षी थी और उसने अपने बेटे नीरो को राजा बनाने के लिए सम्राट क्लॉडियस से शादी कर ली थी और उसपर नीरो को अपना उत्तराधिकारी बनाने के लिए दबाव बनाया और वह सफल भी हुई. इतिहासकारों का कहना है कि सम्राट क्लॉडियस का निधन स्वाभाविक नहीं था, बल्कि उसे एग्रीपिना ने जहर दिया था.

मां से नाराज था नीरो, करवा दी हत्या

नीरो की मां ने उसे राजा बनाने के लिए कई साजिशें रचीं थी, बावजूद इसके जब उसकी मां एग्रीपिना ने सत्ता के कामों में हस्तक्षेप किया तो नीरो को अच्छा नहीं लगा और उसने पहले तो अपनी मां को मारने के लिए जहाज में विस्फोट करवाया, लेकिन जब उस दुर्घटना में उसकी मौत नहीं हुई,तो उसने घर में सैनिकों से उसकी हत्या करवा दी.

प्रशंसा में ताली नहीं बजाने वालों को मिलती थी मौत

नीरो के बारे में यह कहा जाता है कि वह अय्याश राजा था. वह दिन रात संगीत और नृत्य में डूबा रहता था. रोमन इतिहासकार टैसिटस (Tacitus) ने अपनी किताब Annals में लिखा है कि नीरो ने अपने महल को रंगमहल बना दिया था. जहां शराब, नृत्य और नग्नता का माहौल चारों ओर था. वह जबरदस्ती लोगों को अपना संगीत सुनाता था और जो लोग उसकी प्रशंसा में ताली नहीं बजाते थे उसे मौत मिलती थी. उसकी क्रूरता की सबसे चर्चित घटना है रोम में आग का लगना. इस बारे में टैसिटस ने लिखा है – “Nero watched the fire from the tower of Maecenas, charmed by the beauty of the flames, and sang the ‘Sack of Troy’ in theatrical costume.” नीरो के बारे में कहा जाता है कि जब रोम के एक हिस्से में आग लगी तो उसने कोई कार्रवाई करने की बजाय उस आग का आनंद लिया.

भोज के वक्त छत से इत्र और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई जाती थीं

नीरो की दावत

उसकी अय्याशी के बारे में लिखा गया है कि- नीरो ने खास महल बनवाया था जो दो पहाड़ियों के बीच फैला था. भोज के वक्त छत से इत्र और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई जाती थीं और नग्न नर्तकियां मेहमानों पर शराब उड़ेलती और उनका मनोरंजन करती थीं. इतिहासकार सूएटोनीयस ने अपनी किताब The Twelve Caesars में लिखा है कि नीरों ने अपने पुरुष दास स्पोरस से विवाह किया था और उसके साथ पति-पत्नी की तरह रहता था. वह विलासिता में इस कदर रमा था कि उसे अपनी प्रजा की कोई चिंता ही नहीं थी.

ईसाइयों पर किया अमानवीय अत्याचार

नीरो ने ईसाइयों पर जो अत्याचार किया वह विश्व इतिहास का काला अध्याय है. 64ईसवी में रोम में भयंकर आग लगी थी, उस आग के बारे में कहा जाता है कि उसने रोम को तबाह कर दिया था और वह आग छह दिनों तक लगातार जलती रही थी. इतिहासकार यह मानते हैं कि वह आग नीरो ने खुद लगवाई थी क्योंकि उसे अपना स्वर्ण महल बनवाना था. जब प्रजा में गुस्सा बढ़ा तो उसने आग लगाने का दोष ईसाइयों पर मढ़ दिया. आग की वजह से ईसाइयों पर भयंकर अत्याचार किया गया.उन्हें सूली पर चढ़ाया गया, जिंदा जलाया गया महिलाओं और बच्चों का शारीरिक शोषण और बलात्कार हुआ. जो घटना सबसे खतरनाक है वह यह है कि उसने ईसाइयों को मशाल की तरह बागों में जिंदा जलाया, ताकि अंधेरे में रोशनी होती रही. उसके अत्याचार से जब प्रजा आजिज हो गई, तो नीरो को महल छोड़कर भागना पड़ा. जब नीरो को विश्वास हो गया कि अब वह नहीं बच सकता है तो उसने आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन वह अपना नस नहीं काट सका तब उसने अपने गुलाम की मदद से अपने गर्दन में छुरा घोंप लिया, जिससे उसकी मौत हो गई.उसके अंतिम शब्द थे -क्या एक महान कलाकार ऐसे मरा करता है?

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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