NARI 2025 : रांची-पटना, दिल्ली और कोलकाता में डरती हैं महिलाएं, भुवनेश्वर-मुंबई में हैं सुरक्षित

NARI 2025 Women Safety : हमारे देश में आज भी महिलाएं रात के अंधेरे में खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं और अपनी स्वतंत्रता को सीमित कर लेती हैं. वे अपने साथ हो रही छेड़खानी की शिकायत दर्ज नहीं कराती, बल्कि उस काम को ही करना बंद देती हैं, जहां उसके साथ बदसलूकी हुई है. NARI 2025 के अध्ययन में यह सच सामने आया है . भुवनेश्वर और मुंबई जैसे शहर जहां महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराते हैं, वहीं रांची-पटना जैसे शहर उन्हें डराते हैं.

NARI 2025 Women Safety : महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के तमाम दावों के बावजूद जब आंकड़े निकलकर सामने आते हैं, तो हमारे पैरों तले की जमीन खिसक जाती है. NARI 2025 की रिपोर्ट के अनुसार अभी भी देश में महिलाओं की सुरक्षा का राष्ट्रीय स्कोर 65% ही है और अभी भी महिलाएं रात के अंधेरे में घर से निकलने में असुरक्षित महसूस करती हैं.

महिलाओं के लिए देश के सबसे सुरक्षित शहर

NARI 2025 की रिपोर्ट कहती है कि देश में कोहिमा, विशाखापट्टनम्, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटागर और मुंबई महिलाओं के लिए देश के सबसे सुरक्षित शहर हैं. इन शहरों में लैंगिक भेदभाव देखने को नहीं मिलता है. साथ ही नागरिक भागीदारी और पुलिस व्यवस्था महिलाओं के अनुकूल थीं, जहां वे सहजता के साथ अपनी बात कह सकती थीं.

शहर जहां महिलाओं को लगता है डर

रांची, श्रीनगर, कोलकाता, दिल्ली, फरीदाबाद, पटना और जयपुर देश के ऐसे शहर हैं, जहां की महिलाएं खुद को सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस करती हैं. इन शहरों में महिलाएं सड़कों पर खुद को घूरे जाने, छेड़खानी और बाॅडी टच किए जाने की समस्याओं से खुद को डरा हुआ महसूस करती हैं. खास कर रात के अंधेरे में उन्हें इन समस्याओं का सामना ज्यादा करना पड़ता है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सिनेमा घरों में भी उन्हें डर लगता है. कई बार लड़कियां और महिलाएं इन समस्याओं की वजह से या तो पढ़ाई छोड़ देती हैं या फिर अपनी नौकरी छोड़ देती हैं.

महिलाओं ने प्रताड़ना की शिकायत की

सर्वे में 7 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे छेड़खानी का शिकार हुई हैं, इनमें 18-24 साल की लड़कियां शामिल हैं. देश की लगभग आधी महिलाओं को यह स्पष्ट नहीं था कि उनके कार्यस्थल पर POSH (यौन उत्पीड़न निवारण) नीति है या नहीं; जिन महिलाओं के कार्यालय में ऐसी नीतियां थीं, उन्होंने आम तौर पर उन्हें प्रभावी बताया. कुल मिलाकर, सर्वेक्षण में शामिल दस में से छह महिलाओं ने अपने शहर में खुद को सुरक्षित महसूस किया, लेकिन 40 प्रतिशत ने अभी भी खुद को इतना सुरक्षित नहीं या असुरक्षित माना.

आपराधिक आंकड़ों से नहीं पता चलता महिलाओं की वास्तविक स्थिति

NARI 2025 की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल आधिकारिक अपराधि आंकड़े महिलाओं की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शा सकते. इसकी वजह यह है कि कई बार महिलाएं अपने साथ हुए अपराध की शिकायत ही दर्ज नहीं कराती हैं. वे जब खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, तो खुद को सीमित कर लेती हैं ताकि उसके साथ अपराध ना हो, लेकिन महिलाएं जिस वजह से सीमित हो रही हैं, उन वजहों को मिटाने की जरूरत है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

31 शहरों में हुआ सर्वेक्षण

नारी 2025 ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 31 शहरों की 12,770 महिलाओं से बातचीत की. उसी बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है. भारत में महिला सुरक्षा की व्यापक जांच-पड़ताल के लिए यह रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप महिला सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

ये भी पढ़े: Hindu Mughal Queen : आजीवन हिंदू परंपरा के साथ जीने वाली मुगल रानियों का कैसे हुआ था अंतिम संस्कार?

आजाद भारत में मुगलों ने मांगी भीख, अंग्रेजों ने 29 बेटों और पोतों का किया था कत्ल

Mughal Harem Stories :  मुगल हरम की औरतों ने मौत की परवाह किए बिना रात के अंधेरे में प्रेम को दिया अंजाम

Child Mental Health : बच्चे हो रहे हैं दबंग, रेप और आत्महत्या करने में भी नहीं करते संकोच, जानिए क्या है वजह

NARI का गठन कब हुआ था?

NARI का गठन 2023 में हुआ था.

NARI किन मुद्दों पर काम करती है?

NARI महिलाओं की सुरक्षा पर काम करती है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >