मुर्शिदाबाद की स्थापना एक हिंदू ब्राह्मण बाद में मुसलमान बने मुर्शिद कुली खान ने की थी

Murshidabad Violence : वक्फ अधिनियम को लेकर कुछ दिनों पहले तक बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला हिंसा की आग में जल रहा था. एक पिता-पुत्र की हत्या घर से निकालकर कर दी गई, अभी भी दोनों समुदाय एक दूसरे को शक की नजर से देख रहे हैं और राजनीति जारी है. मुर्शिदाबाद जो कभी हिंदू-मुसलमान सहजीवन का आदर्श था और जिसने अपनी नीतियों की वजह से बंगाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया था, वो आज बदहाल हो चुका है.

Murshidabad Violence : जन्म से एक हिंदू ब्राह्मण ने बंगाल के मुर्शिदाबाद की स्थापना की थी. हालांकि उस व्यक्ति का पालन-पोषण एक मुस्लिम ने किया था, इसलिए उनसे इस्लाम स्वीकार कर लिया था. मुर्शिदाबाद जिला मुगलों के समय उनकी आय का बड़ा स्रोत था, यहां से मलमल और मसाले का व्यापार होता था और इस काम में हिंदू और मुसलमान दोनों साथ जुटे थे. मुर्शिदाबाद में हिंदू-मुसलमान के बीच सहजीवन था और त्योहारों पर खुशियां मनाई जाती थी. आज उसी मुर्शिदाबाद में हिंदू और मुसलमान आमने-सामने हैं.

मुहम्मद अजीज उद्दीन बंगाल का सूबेदार था, बंगाल था खस्ताहाल

औरंगजेब ने अपने पोते मुहम्मद अजीज उद्दीन जिसे अजीम-उश-शान भी कहा जाता है, उसे बंगाल का सूबेदार बनाया था. वह 1697 में यहां आया था और काम देख रहा था. लेकिन औरंगजेब ने जिस उम्मीद से उसे यहां भेजा था, वह पूरा नहीं हो पा रहा था तब औरंगजेब ने राजस्व वृद्धि के लिए मुर्शिद कुली खान को बंगाल भेजा. औरंगजेब को यह उम्मीद थी कि मुर्शिद कुली खान मुगलों की खस्ता होती स्थिति को सुधारेगा और राजस्व में वृद्धि करेगा.

मुर्शिद कुली खान और मुहम्मद अजीज उद्दीन में नहीं बनी

मुर्शिद कुली खान जब बंगाल आया उस वक्त ढाका बंगाल की राजधानी थी. औरंगजेब ने उसे 1700 में बंगाल भेजा. बंगाल आने के बाद उसने पूरे सूबे के राजस्व को करोड़ों में पहुंचा दिया, जो मुगलों की टूटती हिम्मत को सहारा था. प्रसिद्ध इतिहासकर जदुनाथ सरकार ने History-Of-Bengal–Vol-2 में लिखा है कि मुर्शिद कुली खान जन्म से ब्राह्मण था, लेकिन उसे बचपन में ही हाजी शफी को बेच दिया गया था और उसने मुर्शिद कुली खान को मुसलमान बनाया और उसकी परवरिश की. मुर्शिद का नाम मुहम्मद हादी था. मुर्शिद कुली खान की उसे उपाधि दी गई थी. जदुनाथ सरकार लिखते हैं कि जब मुहम्मद हादी दीवान के रूप में बंगाल आया था, तो उसके अधिकार स्पष्ट नहीं थे, लेकिन उसने अपनी नीतियों से बंगाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और करोड़ों का राजस्व दिल्ली को भेजने लगा. औरंगजेब उसपर बहुत भरोसा भी करता था और उसे काम करने की पूरी आजादी दे रखी थी. बंगाल में पहले जागीर थे और उनके अधीन कर वसूली की व्यवस्था थी. इससे सरकार के खजाने में ज्यादा कुछ आता नहीं था. मुर्शिद कुली खान ने जागीरों को राज्य के खजाने में मिला दिया, जिससे राजस्व बढ़ गया. उसने राजस्व वसूली का काम ठेके पर देना शुरू किया जिसका बहुत लाभ मिला. मुर्शिद कुली खान स्वतंत्र काम कर रहा था जो अजीम उश शान को पसंद नहीं था, वह चाहता था दीवान मुर्शिद उसके अधीन काम करे. दोनों के बीच अनबन की यह बड़ी वजह बना.

मुर्शिद कुली खान ने बसाया मुर्शिदाबाद

मुर्शिद कुली खान औरंगजेब के प्रति समर्पित था, उसके प्रति निष्ठा दिखाने के लिए वह हमेशा तत्पर रहता था. दीवान मुर्शिद, सूबेदार अजीम से अधिक प्रतिभावान था, इस वजह से दोनों के बीच बन नहीं रही थी और सत्ता को नुकसान हो रहा था. अजीम उश शान से दूरी बनाने के लिए मुर्शिद कुली खान ने भागीरथी नदी के किनारे मुर्शिदाबाद को बसाया. मुर्शिदाबाद के जरिए व्यापार बहुत सहज हो गया और विदेश से व्यापार होने लगा. उस वक्त शासन में मुसलमान थे, लेकिन व्यापार करने वालों में हिंदू अधिक थे. मुर्शिदाबाद की जनसंख्या भी हिंदू बहुल थी, इस वजह से यहां हिंदू-मुस्लिम एकता दिखी और वे साथ रहते थे. भागीरथी नदी बंगाल के कई हिस्सों को जोड़ती थी इसलिए राजस्व वसूली और प्रशासन में काफी मदद मिली. नदी किनारे होने की वजह से सुरक्षा की दृष्टि से भी यह नगर काफी सुरक्षित था. मुर्शिद कुली खान ने यहां कटरा मस्जिद बनवाया था.

मुर्शिदाबाद में अब मुसलमानों की संख्या अधिक

स्थापना के वक्त मुर्शिदाबाद नगर में मुसलमानों की संख्या कम थी, जबकि हिंदू बहुसंख्यक थे. लेकिन 2011 की जनगणना के अनुसार मुर्शिदाबाद में मुसलमान 66.27% है, जबकि हिंदू 33.21% हैं. वक्फ अधिनियम के अस्तित्व में आते ही यहां दंगा भड़का और हिंदू और मुसलमान आमने-सामने आ गए. हिंसा की आग में पिता-पुत्र सहित तीन लोगों की मौत हुई है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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