क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, क्या है अमेरिका के दावे का सच?

India-US trade deal : अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए टैरिफ को 25% से 18% करने और रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए पेनाल्टी को वापस लिए जाने के बाद यह सवाल सबके मन में है कि आखिर यह कैसे संभव हुआ. हाल में हुए ट्रेड डील और अन्य फैसलों पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि भारत–अमेरिका संबंधों में सबकुछ ब्लैक एंड व्हाइट की तरह नहीं है, बहुत कुछ ग्रे भी है. कहने का अर्थ यह है कि जिस तरह के बयान सामने आएं हैं और जो हकीकत है, उसमें फर्क है. आइए पूरी बात समझते हैं.

India-US trade deal : अमेरिकी प्रशासन ने शनिवार 7 फरवरी को यह घोषणा की है कि भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाया गया 25% पेनाल्टी हटा दिया गया है. साथ ही भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर भी टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है. अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला सुनने में तो बहुत बड़ी जीत की तरह प्रतीत होता है, लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या टैरिफ हटने के पीछे महज भारत की कूटनीति है?

यह सवाल इसलिए भी बहुत लाजिमी हो जाता है, क्योंकि व्हाइट हाउस के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में यह बताया गया है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जबकि भारत–अमेरिका ट्रेड डील के बाद संयुक्त बयान में इस तरह की कोई बात नहीं कही गई है.

रूस से भारत के तेल खरीदने के पीछे क्या है सच्चाई?

अमेरिकी प्रशासन का यह दावा है कि भारत सरकार ने उनसे वादा किया है कि वे रूस से तेल खरीदना बंद कर देंगे और इसी वादे के तहत भारत ने रूस से तेल आयात को कम करना शुरू कर दिया है, जिसके बाद अमेरिका ने 25% पेनाल्टी को हटा दिया है, जबकि भारत ने रूस से तेल खरीदने को लेकर अबतक ऐसा कोई बयान नहीं दिया है कि रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया गया है.

वर्षरूस से आयात (bpd)भारत के कुल क्रूड आयात का अनुपात ट्रेंड / टिप्पणी
2021100,000 (0.1 मिलियन)2–3%रूस पहले छोटा सप्लायर
2022740,00015%पश्चिम के प्रतिबंधों के बाद रूस से खरीद में तेज वृद्धि
20231,754,00036–39%रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया.
20241,7–2,08 मिलियन35–40%आंकड़े बताते हैं कि कई महीनों में 2M+ bpd रहा
20251,2–1,8 मिलियन20–35%जनवरी में गिरावट; टैरिफ दबाव

भारत–अमेरिका ट्रेड डील के बाद भी ऐसा कोई बयान संयुक्त रूप से जारी नहीं हुआ है. ऐसे में अमेरिकी प्रशासन का यह कहना कि भारत ने वादा किया है, संशय खड़े करता है. भारत सरकार की ओर से लगातार यह बयान सामने आया है कि रूस से तेल खरीदने पर फैसला बाजार और देश के नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. 2023 में रूस भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था और 2025 में भी यह शीर्ष सूची में है, हालांकि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के आंकड़े को देखें, तो यह जरूर कहा जा सकता है कि दिसंबर 2025 में तेल आयात अपने निचले स्तर पर रहा है.

क्या ऐसा संभव है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे?

भारत और रूस के संबंध बहुत पुराने हैं और दोनों मित्र राष्ट्र हैं. रूस ने हर विपरीत समय में वैश्विक मंच पर भारत का साथ दिया है. भारत ने चार बार खुले तौर पर भारत के समर्थन में अपने वीटो पावर का इस्तेमाल भी किया है. रक्षा सौदों में भी रूस ने हमेशा भारत की भरपूर मदद की है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने रूसी रक्षा प्रणाली एस–400 के जरिए ही पाकिस्तान के हमलों को बेकार किया था. जहां तक तेल खरीद की बात है, तो भारत जितना तेल आयात करता है, उसमें रूस का योगदान सबसे अधिक है.

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2023 में भारत ने अपने कुल तेल आयात का 39 प्रतिशत रूस से खरीदा था. 2025 में यह आयात 20–35 प्रतिशत के बीच रहा, इस लिहाज से यह तो कहा जा सकता है कि भारत ने आयात में कमी की है, लेकिन यह बात सही नहीं लगती है कि भारत, रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर सकता है. इसकी वजह यह है कि भारत ने रूस से कई काॅन्ट्रैक्ट किए हुए हैं, उन्हें बीच में तोड़ना संभव नहीं है.

क्या अमेरिका का तेल भारत के लिए रूसी तेल का विकल्प बन सकता है?

भारत के लिए अमेरिका से तेल खरीदना बहुत कठिन है. इसकी वजह यह है कि अमेरिका से तेल की शिपिंग बहुत महंगी है. पश्चिम एशिया से तेल मंगाने में भारत को जितना पैसा लगता है उसका दोगुना अमेरिका से तेल की शिपिंग में लगेगा. अमेरिका का कच्चा तेल हल्का और कम गाढ़ा होता है, जबकि भारतीय रिफाइनरी में मीडियम साॅर तेल को रिफाइन करने की व्यवस्था. इसकी वजह यह है कि भारत रूस और पश्चिम एशिया से ही तेल खरीदता रहा है, जहां इसी क्वालिटी का तेल मिलता है. इस वजह से कच्चे तेल का आयात अमेरिका से बढ़ेगा इसकी उम्मीद कम ही है, हां गैस यानी LNG की खरीद भारत अमेरिका से बढ़ा सकता है.

क्या भारत ने टैरिफ हटवाने के लिए अपने हितों की अनदेखी कर दी है?

अमेरिका ने जब से भारत पर टैरिफ कम करने की घोषणा की है, सबके मन में यह सवाल है कि क्या भारत ने अपने हितों की अनदेखी कर दी है? इस सवाल का जवाब यह है कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए डील में अपना नुकसान नहीं किया है. एग्रीकल्चर और डेयरी क्षेत्र में भारत ने अमेरिका को छूट नहीं दी है और अपने हितों का संरक्षण किया है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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