जेन-जी का नया प्रोटेस्ट मॉडल : मीम, रील और हैशटैग से सरकार पर निशाना

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा युवा और छात्रों का विरोध प्रदर्शन सिर्फ नारों और पोस्टरों तक सीमित नहीं है. विरोध में क्रिएटिविटी है, तकनीक है और एक अलग तरह का संदेश भी. आखिर Gen Z ने विरोध का यह नया तरीका क्यों चुना? इसके पीछे क्या वजह है?

मिसाल ढूंढनी हो तो लोग इतिहास के पन्ने पलटते हैं. लेकिन Gen Z... वो खुद ही मिसाल बनकर घूम रही है.

कोई बात समझनी हो या बात को समझाना हो, तो कोई बढ़िया-सा उदाहरण या कोई ऐसा मिसाल दिजिए, जिसे सुनकर लोग कहें, वाह, क्या बात कही हैं! लेकिन नई पीढ़ी का हिसाब थोड़ा अलग है. ये किसी और की मिसाल नहीं ढूंढ़ती... ये खुद मिसाल बन जाती है. और इनकी भाषा, इनका अंदाज और इनका ह्यूमर समझ आ गया, तो ठीक... नहीं समझ आया, तो फिर यही 'मिसाल' कब 'मिसाइल' बन जाए, पता भी नहीं चलता.

अब आप सोच रहे होंगे कि मिसाल और मिसाइल की बात हो रही है, अब क्या कर दिया Gen Z ने तो एक बार जंतर-मंतर घूम आइए...वहां सड़क पर आपको विरोध की मिसाल दिखेगी... और मोबाइल खोलते ही सोशल मीडिया पर उसी विरोध का ऐसा अवतार दिखेगा, जो किसी मिसाइल से कम नहीं है.

तभी तो कोई लाठीचार्ज से पहले को आउटफिट लुक (Outfit Look) वाली रील बना रहा है. कोई आंसू गैस का रिव्यू ऐसे कर रहा है, जैसे नया कैफे ट्राई किया हो. कोई भागते-भागते 'सबवे सर्फर्स' का म्यूजिक लगा रहा है, तो कोई पुलिस से बचने की वीडियो पर लिख रहा है, "कार्डियो कराने के लिए धन्यवाद, दिल्ली पुलिस. यही Gen Z है... जो विरोध भी करती है, कैमरा भी ऑन रखती है और मीम बना कर अपनी बात भी कह देती है.

सिर्फ सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर भी आंदोलन

अगर आप इस तरह के वीडियो और पोस्ट पहली बार देख रहे हों, तो शायद लगे कि यह कोई कॉमेडी कंटेंट है. लेकिन नहीं...ये देशभर में, नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शन का वीडियो है. पहली नजर में यह सब आपको अजीब लग सकता है.

लेकिन प्रदर्शन में शामिल Gen Z के लिए विरोध जताने का यह नया और यूनिक तरीका है.इंटरनेट के दौर में बड़ी हुई यह पीढ़ी अपना विरोध भी उसी भाषा में जाहिर कर रही है, जिसे वह सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती है.

विरोध कर रहे युवा और छात्र प्रदर्शन में बैटमैन, स्पाइडरमैन, सुपरमैन और आयरन मैन की पोशाक पहनकर पहुंच रहा है तो कोई महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर बना हुआ है. रंग-बिरंगे पोस्टर, मजेदार तख्तियां और इंटरनेट वाली भाषा ने इस आंदोलन को अलग पहचान दी है.

कई वीडियो में भागते प्रदर्शनकारियों के साथ 'चक दे इंडिया', 'भाग मिल्खा भाग' और 'गंगनम स्टाइल' जैसे गाने लगाए गए हैं तो सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया है, मोबाइल गेम 'सबवे सर्फर्स' के म्यूजिक का. दरअसल, इस गेम में खिलाड़ी पुलिस से बचकर दौड़ता है तो प्रदर्शनकारियों भी उसी धुन पर भागते हुए अपना वीडियो शेयर कर रहे है. इतना ही नहीं इसको लेकर कैप्शन दिया गया है...

एक दूसरे वीडियो के कैप्शन में लिखा है...

  • संसद की डोर बेल बजाकर भाग गया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई मीम और पोस्ट वायरल हो रहे

एक पोस्ट में लिखा गया है

"देश में नौकरियां कम हैं, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे रहे."

दूसरे में मजाक किया गया,

"शायद महीने की सैलरी आने का इंतजार है, फिर इस्तीफा देंगे ताकि फुल एंड फाइनल सेटलमेंट मिल जाए."

एक अन्य पोस्ट में लिखा है

"शायद दूसरी नौकरी का ऑफर नहीं मिला, इसलिए इस्तीफा नहीं दे रहे."

रैप और गीत-संगीत के जरिए विरोध

प्रदर्शन कर युवा और छात्र रैप और गीत-संगीत के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं, गीत के अनोखे लिरिक्स सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है, जिसकी तारीफ भी हो रही है. यूट्यूबर और रैपर 'गरम कलाकार' का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह गा रहे हैं.

जंतर-मंतर पर छात्रों का जोश देखा, पुलिस की कार्रवाई देखी, सिविल ड्रेस में लोगों को देखा और कई पुलिसकर्मियों की नेम प्लेट गायब देखी.

यह वीडियो कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच गया.

'Get Ready With Me'... लेकिन प्रदर्शन के लिए

प्रदर्शन में जाने से पहले कई युवाओं ने इंस्टाग्राम के लोकप्रिय GRWM (Get Ready With Me) और OOTD (Outfit of the Day) फॉर्मेट में वीडियो बना रहे हैं

एक युवती अपने वीडियो में कहती दिख रही है..

"सरकार के पतन का गवाह बनने के लिए मेरे साथ तैयार हो जाइए. मैंने पहन रखी है हिम्मत, कुछ झुमके और अपना संवैधानिक अधिकार... ओह, रहने दीजिए.

एक दूसरी युवती ने अपना मेकअप दिखाते हुए कह रही

"मेरा फाउंडेशन मजबूत है... सरकार की तरह नहीं."

आंसू गैस पर भी बन रहे मीम

आंसू गैस को लेकर भी सोशल Media पर खूब व्यंग्य देखने को मिल रहा. प्रदर्शन कर रहे युवा पुलिस पर आंसू गैस को लेकर तंज भरे लहजे में पूछ रहा है...

सर,टियर गैस की व्यवस्था है ना ?

एक पोस्ट में लिखा है...

"दिल्ली पुलिस, आंसू गैस मत छोड़िए. इससे प्रदूषण बढ़ेगा, फिर पर्यावरण मंत्री का भी इस्तीफा मांगना पड़ेगा."

एक दूसरा वीडियो वायरल हो रहा, जिसमें एक युवक कह रहा है कि वो आंसू गैस टेस्ट करने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुआ था. वो कह रहा है उसे लग रहा था सरकार इसमें भी मिलावट कर सकती हैं. लेकिन आज इस्तेमाल हुई

"आंसू गैस 100 प्रतिशत शुद्ध थी."

एक प्रदर्शनकारी ने लिखा,

"मैं पूरी तरह सुरक्षित हूं. मेरे चारों तरफ पुलिस है... अब मुझे कोई नहीं मार सकता."

वायरल होने के लिए नहीं..इसलिए बना रहे थे वीडियो

इस आंदोलन को कवर करने वाले पत्रकारों ने जिन प्रदर्शनकारियों से बात की, उनमें से किसी ने यह नहीं कहा कि वे वीडियो सिर्फ वायरल होने या एल्गोरिद्म के लिए बना रहे है . उनके लिए वीडियो रिकॉर्ड करना भी प्रदर्शन का हिस्सा था.

सबसे खास बात यह रही कि ज्यादातर मजाक किसी और पर नहीं, बल्कि खुद पर था. कोई लाठीचार्ज से बचने के लिए कई किलोमीटर दौड़ने का मजाक उड़ा रहा था, तो कोई आंसू गैस से भागने से पहले आउटफिट वीडियो रिकॉर्ड करने पर हंस रहा था. हालांकि इन वीडियो से यह नहीं लगता कि उनको पुलिस का डर नहीं था. बल्कि डर और हास्य दोनों साथ-साथ मौजूद थे.

तकनीक के साथ बड़ी हुई यह पीढ़ी पहले ज्यादा एक्सप्रेसिव है : डॉ भूमिका सच्चर

Gen Z के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के पीछे की सोच और उनकी रणनीति को समझने के लिए प्रभात खबर ने मनोवैज्ञानिक डॉ भूमिका सच्चर से बात की. डॉ भूमिका ने बताया कि तकनीक के साथ बड़ी हुई यह पीढ़ी अपनी बात रखने, जानकारी जुटाने और विरोध दर्ज कराने के लिए पहले की पीढ़ियों से बिल्कुल अलग तरीके अपनाती है. वो अपने शब्दों में कहती हैं.

आज की Gen Z तकनीक के साथ बड़ी हुई पीढ़ी है. टेक्नोलॉजी ने उन्हें पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक, आत्मनिर्भर और एक्सप्रेसिव बनाया है. वे किसी भी जानकारी के लिए केवल माता-पिता या समाज पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि खुद खोजते हैं, समझते हैं और अपनी राय बनाते हैं. इसलिए कई विषयों पर उनके मन में पहले जैसी झिझक या सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) नहीं होता.

डॉ भूमिका कहती हैं कि उनका मानना है कि Gen Z को दबाव में रखकर नहीं चलाया जा सकता, उनसे जितना खुलकर संवाद करेंगे और उनकी बात सुनेंगे, रिश्ते उतने ही बेहतर होंगे.

देखिए कुछ वायरल पोस्ट


ये भी पढ़ें : CJP Protest : जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए कौन भेज रहा खाने का पार्सल ?


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By गौतम कुमार

दैनिक भास्कर से शुरू हुआ ये कारवां अब प्रभात खबर तक आ पहुंचा है. पढ़ाई और पत्रकारिता की बारीकियां सीखने का सफर अभी जारी है, किताबों से भी सीख रहा हूं, लोगों से भी और खबरें तो है हीं..

पेशा पत्रकारिता का है, लेकिन जिज्ञासा उसकी सीमाओं से थोड़ी बड़ी है. राजनीति, इतिहास, साहित्य, संगीत, खेल, लोक संस्कृति या फिर मनोरंजन... जो भी नई बात मिले, उसे समझने की कोशिश करता हूं और जो भी दिलचस्प लगे, उसमें खो जाता हूं. किताब कैसी है, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, मिल जाएं तो वक्त का पता नहीं चलता और हां, अच्छी फिल्में मिल जाएं तो फिर बाकी दुनिया थोड़ी देर के लिए इंतजार कर सकती है.

लिखना पसंद है, इसलिए रोज थोड़ा बेहतर लिखने की कोशिश करता हूं. जो पढ़ता हूं, देखता हूं, समझता हूं और लगता है कि आपकी टाइमलाइन तक पहुंचना चाहिए, वही यहां शेयर करता हूं. हो सकता है एक-आध बात पर आपकी राय अलग हो, लेकिन बातचीत और सीखने का सिलसिला शुरू हो सकता है, इसके लिए आपके सुझाव आंमत्रित है...

बाकी, खबरों के पीछे की कहानी और कहानियों के पीछे की खबर तलाशने का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा...

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >