क्या है अमेरिका का नया फोर्स्ड लेबर टैरिफ, जानिए भारत पर 10% टैक्स से आपकी जेब पर क्या होगा असर?

अमेरिका ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े सामान पर सख्ती के लिए दुनिया भर के 60 देशों पर नया टैरिफ लगाया है. भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% टैरिफ लगा दिया है. जानिए इसका आपकी जेब और रोजगार पर क्या असर पड़ सकता है.

अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% टैरिफ (आयात शुल्क) लागू कर दिया है. यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के सेक्शन 301 के तहत लिया गया है. अमेरिका का कहना है कि यह कदम फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े सामान पर सख्ती के लिए उठाया गया है. गौरतरलब है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा 15% अस्थायी ग्लोबल टैरिफ समाप्त होने के बाद नया 10% टैरिफ लागू किया गया है.

सेक्शन 301 क्या है और फोर्स्ड लेबर से इसका क्या संबंध है?

सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक प्रावधान है. इसके तहत अगर अमेरिकी सरकार को लगता है कि किसी देश की व्यापारिक नीतियां या प्रथाएं अमेरिकी कारोबार, उद्योगों या व्यापार हितों के लिए अनुचित हैं, तो वह उस देश के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सकती है. इस कार्रवाई में अमेरिकी सरकार,

  • अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकती है.
  • कुछ उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा सकती है.
  • दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध लागू कर सकती है.

इसकी जांच अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) करता है. जांच के दौरान संबंधित देश से जवाब मांगा जाता है और जरूरत पड़ने पर बातचीत भी होती है. इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर कार्रवाई लागू की जाती है.

गौरतलब है कि इस मामले में अमेरिका ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े सप्लाई चेन जोखिमों को कार्रवाई का आधार बनाया है. यानी सेक्शन 301 स्वयं फोर्स्ड लेबर से संबंधित कानून नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जिसके तहत अमेरिका विभिन्न व्यापारिक कारणों, जिनमें फोर्स्ड लेबर से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं, के आधार पर टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है.

फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी से क्या मतलब है

फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी, इसका मतलब होता है कि किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराना. जैसे कि..

  • किसी व्यक्ति द्वारा धमकी देकर काम कराया जाना
  • काम करने के बाद भी उसका वेतन रोक लिया जाना
  • पहले से लिए गए कर्ज को खत्म करने के लिए पर काम करवाना
  • किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या दूसरे दस्तावेज जब्त कर, उससे अपनी शर्तों पर काम करवाना
  • कम मजदूरी या फिर काम का अतिरिक्त बोझ होने के बाद भी नौकरी छोड़ने की आजादी नहीं देना

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है. ऐसा पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या सस्थान और संगठन पर कार्रवाई कर सकता है.

भारत पर 10% तो दूसरे देशों पर कितना अतिरिक्त टैरिफ

अमेरिका का कहना है कि अगर किसी देश से आने वाले सामान में फोर्स्ड लेबर का इस्तेमाल पाया जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है. इसका मकसद कंपनियों पर दबाव बनाना है, ताकि उनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने सामान का इस्तेमाल न हो. अमेरिका ने कुल 60 देश (17 देशों पर 10% टैरिफ और 43 देशों पर 12.5% टैरिफ)पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया है.

10% नए US टैरिफ से आपकी जेब और रोजगार पर पड़ेगा असर ?

अमेरिका की नई 10% अतिरिक्त टैरिफ का भारतीय उपभोक्ताओं और आम आदमी पर सीधा असर महंगाई के बजाय आमदनी (Income) और रोजगार (Jobs) के जरिए पड़ेगा. अगर निर्यात में गिरावट आती है तो सबसे ज्यादा असर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर पर पड़ सकता है. जैसे कि टेक्सटाइल, गारमेंट, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी और सीफूड प्रोसेसिंग. इन उद्योगों में लाखों लोग काम करते हैं. अगर ऑर्डर कम हुए तो...

  • नई भर्ती घट सकती है.
  • ओवरटाइम कम हो सकता है.
  • छोटे निर्यातकों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.
  • कहीं कहीं पर लेऑफ की नौबत भी आ सकती है.

आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल यह टैरिफ भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का बड़ा कारण नहीं दिखता. हालांकि अगर लंबे समय तक निर्यात प्रभावित रहता है, तो रोजगार, उद्योगों की आय और निवेश के जरिए इसका असर धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था और आम लोगों तक पहुंच सकता है. इसे ऐसे समझिए..

भारत में कपड़े सस्ते होंगे?

जरूरी नहीं है कि कपड़े सस्ते हों लेकिन यदी निर्यात घटता है तो कुछ कंपनियां घरेलू बाजार में ज्यादा सामान बेच सकती हैं, लेकिन कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम है.

क्या नौकरियों पर असर होगा?

यदि निर्यात लंबे समय तक घटा तो इन सेक्टरों में रोजगार पर दबाव आएगा और इसका सीधा असर आय और खपत पर पड़ सकता है.

क्या भारत में महंगाई बढ़ेगी?

इस टैरिफ से सीधे तौर पर भारत में महंगाई बढ़ने की संभावना कम है क्योंकि यह भारतीय निर्यात पर लगाया गया टैक्स है, आयात पर नहीं.

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By गौतम कुमार

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