40 Years of Prabhat Khabar : हरिनारायण राय 3 महीने में 30 करोड़ से अधिक के मालिक बने

40 Years of Prabhat Khabar : मंत्री हरिनारायण राय सिर्फ सवा तीन साल में खपरैल से आलीशान मकान के मालिक बन गए हैं. जो सूचनाएं प्रभात खबर में छपी हैं या जो मंत्री की ज्ञात संपत्ति है, उसके अनुसार इस अवधि में उन्होंने करोड़ों की चल-अचल संपत्ति अर्जित की है. मंत्री जी की अज्ञात संपत्ति के ब्यौरा और विवरण भी काफी है. पर वह अज्ञात या सिर्फ चर्चा में है. इन सवा तीन वर्षों में जबसे वह मंत्री बने. उनकी कुल आमद (वेतन, भत्ता वगैरह) 15.39 लाख रुपए की हुई.

40 Years of Prabhat Khabar : जरमुंडी से हरिनारायण राय 2005 में पहली बार विधायक बने थे. जब वे पहली बार विधायक बने थे उस वक्त उनके पास कोई वाहन नहीं था और कुछ हजार रुपए ही नकद उनके पास थे, लेकिन कुछ ही साल में वे करोड़ों के मालिक बन गए और रांची सहित झारखंड के अन्य शहरों में मकान और जमीन खरीदे. उनपर यह आरोप भी लगा कि उन्होंने पहचान छिपाकर संपत्ति खरीदी. उनपर आय से अधिक संपत्ति होने का केस भी दर्ज हुआ और उन्हें सजा भी सुनाई गई. पढ़ें, उनकी संपत्ति के ब्यौरे से जुड़ी एक खास रिपोर्ट जो प्रभात खबर में 29 जून 2008 में प्रकाशित हुई थी.

26 जून 2008 : आमदनी 15.39 लाख, संपत्ति 30.18 करोड़!

हरिनारायण राय वर्ष 2005 में जरमुंडी से विधायक बने. फरवरी 2005 में उनके पास मात्र 40 हजार रुपए नकद थे. मार्च 2005 में राज्य के मंत्री बने. सवा तीन साल से वे मंत्री हैं. मंत्री के रूप में वेतन भत्ता आदि मिलाकर अबत उनकी कुल आमदनी 15.39 लाख रुपए हुई. वर्तमान में उनके पास जो ज्ञात संपत्ति है, उसका बाजार मूल्य लगभग 30.18 करोड़ रुपए है. झारखंड का यह एक मामूली नमूना है. राज्य में ऐसे मंत्री -अफसर भरे पड़े हैं. राज्य में व्यवस्था संविधान के पहरेदार हैं. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आयकर समेत केंद्र सरकार के कई विभाग इन्हें आम जनता को बताना पड़ेगा कि क्या देश में ताकतवर लोगों को भ्रष्टाचार-लूट की खुली छूट है? या फिर यह स्थिति क्यों है?

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झारखंड के ग्रामीण अभियंत्रण संगठन (आरईओ) नगर विकास व पर्यटन विभाग के मंत्री हरिनारायण राय सिर्फ सवा तीन साल में खपरैल से आलीशान मकान के मालिक बन गए हैं. जो सूचनाएं प्रभात खबर में छपी हैं या जो मंत्री की ज्ञात संपत्ति है, उसके अनुसार इस अवधि में उन्होंने करोड़ों की चल-अचल संपत्ति अर्जित की है. मंत्री जी की अज्ञात संपत्ति के ब्यौरा और विवरण भी काफी है. पर वह अज्ञात या सिर्फ चर्चा में है. इन सवा तीन वर्षों में जबसे वह मंत्री बने. उनकी कुल आमद (वेतन, भत्ता वगैरह) 15.39 लाख रुपए की हुई. मान लिया जाए कि उन्होंने खाने-पीने पर अपने इस वेतन (15.39 लाख) से एक धेला भी खर्च नहीं किया, तब भी वह 15.39 लाख से 30.18 करोड़ की संपत्ति कैसे खरीद सकते हैं?

फरवरी 2005 में सिर्फ 40 हजार नकद थे

हरिनारायण राय का घर जिसे अटैच किया गया था.

हरिनारायण राय पहली बार वर्ष 2005 में विधायक बने. जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने फरवरी 2005 में नामांकन पत्र दाखिल किया. साथ ही अपनी संपत्ति की घोषणा भी की. फरवरी 2005 में उनके पास 40 हजार रुपए नकद, 1.25 लाख रुपए का निवेश एनएससी और जीवन बीमा आदि भी था. खेती योग्य 5.5 एकड़ जमीन और एक खपरैल मकान जिक्र घोषणा पत्र में था. चल-अचल संपत्ति के नाम पर उनकी पत्नी के पास सिर्फ 50 हजार रुपए के जेवरात थे. उनकी आमदनी आयकर देने के लायक भी नहीं थी, ना ही उनका परमानेंट एकाउंट ननबर (पैन) था. 

विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मार्च 2005 में वह मंत्री बने. उस वक्त से अबतक मंत्री के पद पर काबिज हैं. यह मान लिया जाए कि विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिर्फ 40 हजार रुपए ही खर्च किए, तो भी मंत्री पद की शपथ लेते वक्त उनके पास फूटी कौड़ी भी नहीं रही होगी. मंत्री बनते वक्त वह 5.5 एकड़ कृषि योग्य जमीन और एक खपरैल घर के मालिक रहे होंगे, पर अब वह करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं.

…तो 15.39 लाख का मालिक होना चाहिए था

मार्च 2005 में मंत्री बनने के बाद से जून 2008 तक की अवधि में मंत्री हरिनारायण राय को 39 माह का वेतन-भत्ता मिला, जो 15.39 लाख रुपए होता है. मंत्री बनने के बाद से अबतक अगर उन्होंने अपने पारिवारिक सदस्यों के खाने-पीने, कपड़ा, दवा आदि की जरूरतें खेती से होनेवाली आमदनी से पूरी की हों, तो उन्हें 15.39 लाख रुपए का मालिक होना चाहिए था, पर वह अन्य स्रोतों से हुई आमदनी के सहारे करोड़ों के मालिक बन बैठे हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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