लगातार बढ़ता तापमान

मौसम विभाग के आकलन के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा के शहरों में लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में लू चल रही है और पंजाब-हरियाणा में भी लू चलने की आशंका है.

अप्रैल के पहले सप्ताह में ही तापमान में तीन से सात डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि से आने वाले दिनों में हीट वेव की भीषणता का अंदाजा लगाया जा सकता है. पांच राज्यों के 21 शहरों का पारा 42 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है. राजस्थान के बाड़मेर में पारा 45.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो अप्रैल के पहले सप्ताह में अब तक का सर्वाधिक तापमान रहा. मौसम विभाग के आकलन के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा के शहरों में लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में लू चल रही है और पंजाब-हरियाणा में भी लू चलने की आशंका है. हीटवेव का सिलसिला आगामी जून तक जारी रहने के आसार हैं.

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है. रविवार को प्रदेश के 10 जिलों में पारा 40 डिग्री के पार चला गया और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली से सटे कई जिलों में लू की शुरुआत हो गयी. हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक, बुंदेलखंड क्षेत्र के सात जिले हीटवेव से सर्वाधिक प्रभावित रहने वाले हैं. मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में रात का तापमान बढ़ने की भी आशंका जतायी है. हालांकि उसने आठ अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की भी आशंका जतायी है, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई के इलाके में बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन तापमान में मामूली फर्क आने की बात कही गयी है.

हीट वेव के मामले में अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है. इस साल तापमान के पिछले वर्ष से अधिक बढ़ने की आशंका को देखते हुए अस्पतालों में पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिये गये हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, हवा की गति में कमी ने गर्मी के बढ़ने में अहम भूमिका निभायी है. विशेषज्ञ बता रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैस की मात्रा बढ़ रही है, जिससे समुद्र के तापमान में वृद्धि हो रही है. गर्मी बढ़ने का यह बड़ा कारण है. अप्रैल, 2024 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था. इसके अलावा दूसरे कारणों से भी पिछले साल देश में भारी गर्मी पड़ी थी. लेकिन इस बार के हालात देख अनुमान लगाया जा रहा है कि तापमान वृद्धि के मामले में पिछले साल का रिकॉर्ड टूट सकता है. चिंता की बात यह है कि बढ़ता तापमान कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है और इससे अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी.

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