भ्रामक विज्ञापन बंद हों

शराब और तंबाकू जैसे उत्पाद न केवल लोगों और परिवारों को तबाह करते हैं, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवा का बोझ भी बढ़ाते हैं.

हमारे देश में शराब और तंबाकू के विज्ञापन पर रोक है, लेकिन इन्हें बनाने-बेचनेवालों ने एक रास्ता निकाल लिया है. वे ठीक उसी उत्पाद के नाम से विज्ञापन बनाते हैं, पर उनमें कुछ अन्य चीजों का उल्लेख कर देते हैं. उदाहरण के लिए, शराब के ब्रांड के नाम पर सोडा या सीडी बेचना या गुटखे की जगह इलायची लिख देना आम चलन बन गया है. इन्हें सरोगेट विज्ञापन कहा जाता है, जिनका इरादा आखिरकार बुनियादी ब्रांड व उत्पाद का प्रचार होता है.

ऐसे विज्ञापन अखबारों, टीवी चैनलों, होर्डिंग, पोस्टर आदि में अक्सर देखे जा सकते हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नियमों और निर्देशों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है. यह हिदायत विज्ञापन एजेंसियों के साथ-साथ उद्योग जगत के संगठनों, उत्पादकों व निर्माताओं तथा मीडिया संगठनों को जारी की गयी है. पहले भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा इस तरह के निर्देश जारी किये जा चुके हैं.

नागरिक संगठनों ने भी भ्रामक विज्ञापनों की शिकायतें की है. इसके बावजूद न तो उत्पादक सुधर रहे हैं और न ही विज्ञापन एजेंसियों का रवैया बदला है. इस प्रवृत्ति का गंभीरता से संज्ञान लिया गया है. सरकारी निर्देश में यह भी रेखांकित किया गया है कि खेल से संबंधित हालिया आयोजनों के वैश्विक प्रसारण के दौरान इस तरह के विज्ञापनों को दिखाया जाता रहा. सरकार की यह चिंता भी सही है कि इन विज्ञापनों में बड़े-बड़े सेलिब्रिटी होते हैं, जिनके प्रोत्साहन से लोगों, विशेष रूप से युवाओं पर नकारात्मक असर पड़ता है.

निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि अगर ऐसे विज्ञापन नहीं रोके जायेंगे, तो केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकार कड़ी कार्रवाई के लिए बाध्य होगा. शराब और तंबाकू के सेवन और लत के दुष्परिणाम जगजाहिर हैं. ये उत्पाद न केवल लोगों और परिवारों को तबाह करते हैं, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवा का बोझ भी बढ़ाते हैं. अब तो ऑनलाइन गेम की आड़ में जुआ खेलने का आमंत्रण देते विज्ञापन भी आम बात हो गये हैं.

इनके बारे में सरकार पहले आगाह कर चुकी है. दुर्भाग्य की बात है कि इन चीजों के विज्ञापन से सिनेमा और खेल जगत की बड़ी हस्तियां जुड़ी होती हैं, जिनके करोड़ों प्रशंसक हैं तथा लोग उन्हें आदर्श की तरह देखते हैं. उन्हें यह सोचना चाहिए कि वे अपनी इस लोकप्रियता और सम्मान का उपयोग कर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

देश की आबादी के लगभग 5.2 प्रतिशत लोगों को शराब की लत से हो रही परेशानी के लिए मदद की दरकार है. लगभग 27 फीसदी कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू है. इस संकट को और गंभीर नहीं बनाया जाना चाहिए. सभी संबद्ध पक्षों को देश के वर्तमान व भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित आचरण करना चाहिए.

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Published by: संपादकीय

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