रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर के विभिन्न हिस्सों में 508 रेलवे स्टेशनों की पुनर्विकास योजना की आधारशिला रखी. यह स्टेशन 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं.

भारत और भारतीयों के लिए रेल यातायात कितना महत्वपूर्ण है यह बात किसी से छिपी नहीं है. पटरियों पर भागती रेलगाड़ियां देश के हजारों शहरों, कस्बों, गांवों को आपस में जोड़ती हैं और लाखों लोगों के लिए यह आवागमन का एक प्रमुख साधन है. यातायात के तमाम साधनों के बावजूद रेल की अपनी एक अलग पहचान रही है. रेल-यात्राएं न केवल लोगों को गंतव्य तक पहुंचाती हैं, बल्कि वह सवारियों के लिए खट्टी-मीठी यादों का एक पिटारा बन जाती हैं.

लेकिन, यह एक दुखद सत्य है कि ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर समय कहीं ठहरा सा प्रतीत होता है. आज भी स्टेशन परिसर में घुसते ही अव्यवस्था का अनुभव होता है. इन्हीं चिंताओं के बीच पिछले वर्ष दिसंबर में स्टेशनों के आधुनिकीकरण की एक योजना शुरू की गयी थी, जिसका नाम अमृत भारत स्टेशन स्कीम रखा गया. इसके तहत लगभग 1300 मुख्य रेलवे स्टेशनों के विकास का लक्ष्य रखा गया है.

योजना के एक अहम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के विभिन्न हिस्सों में 508 रेलवे स्टेशनों की पुनर्विकास योजना की आधारशिला रखी. यह स्टेशन 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं. सबसे ज्यादा 55 स्टेशन उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हैं. बिहार में 49 और झारखंड में 20 स्टेशन हैं. योजना की परिकल्पना रेलवे स्टेशनों को सिटी सेंटर की तरह विकसित करने की है. वहां प्लेटफॉर्मों पर बैठने की बेहतर व्यवस्था, बेहतर वेटिंग रूम और मुफ्त वाइ-फाइ जैसी सुविधाएं होंगी.

स्टेशनों की इमारतों की डिजाइन में स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला की झलक होगी. अमृत भारत स्टेशन स्कीम में जिन सुविधाओं को जुटाने की कोशिश की जा रही है, उसकी छवि हवाई अड्डों और चमकते-दमकते शॉपिंग मॉल्स से मिलती है. विदेशों में भी अक्सर ऐसा होता है, जहां बड़े रेलवे स्टेशन अति आधुनिक मॉल या हवाई अड्डों जैसे प्रतीत होते हैं. भारत में रेलगाड़ियों से सफर करने वाले आम यात्रियों को भी ऐसे ही अनुभवों के बीच यात्रा की सुविधा देने का प्रयास सराहनीय है.

हालांकि, ऊपरी चमक-दमक से ज्यादा जरूरी अभी रेल यात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा है. पिछले कुछ समय में हुई दुर्घटनाओं से इसकी गंभीरता को लेकर चेतावनियां मिली हैं, और सबसे ज्यादा ध्यान पटरियों के रख-रखाव और सुरक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं पर दिया जाना चाहिए. इसी प्रकार रेलगाड़ियों में हर पर्व-त्योहार के अवसर पर जिस तरह से अव्यवस्था दिखाई देती है, उसका भी कोई स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए.

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Published by: संपादकीय

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