आमदनी बढ़ेगी, तभी घटेगा कर्ज संकट

भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट बैंकों की सेहत पर तो अच्छी खबर लाती है, लेकिन खुदरा ग्राहकों के वित्तीय स्वास्थ्य पर चिंता बढ़ाती है. देश में घरेलू ऋण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें उपभोग के लिए लिया गया कर्ज बड़ा हिस्सा है.

भारतीय रिजर्व बैंक की नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के स्वास्थ्य के बारे में तो आश्वस्त करने वाली है. लेकिन यह उनके खुदरा ग्राहकों के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में उतनी आश्वस्त करने वाली नहीं है. देश का घरेलू ऋण दिसंबर, 2025 तक 47.8 फीसदी के नये उच्च स्तर पर पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से यह बहुत अधिक नहीं हो सकता है. पर इन आंकड़ों के पीछे तनाव के वे संकेत हैं, जो ऋण के उद्देश्य, उधारकर्ता कौन हैं और क्या गिरवी रखा जा रहा है, इससे उजागर होते हैं. गैर-आवास खुदरा ऋण अब घरेलू उधार का 58.4 प्रतिशत हिस्सा हैं.

परिसंपत्ति निर्माण या उत्पादक गतिविधि से इतर, लगभग आधे घरेलू ऋण को उपभोग के लिए उधार के रूप में वर्गीकृत किया गया है. आवास ऋण एक परिसंपत्ति बनाता है, जबकि व्यावसायिक ऋण आय का एक जरिया बना सकता है. यहां तक कि शिक्षा ऋण भी भविष्य की कमाई का मार्ग प्रशस्त करता है. लेकिन किराने का सामान, चिकित्सा व्यय या पिछले ऋण के पुनर्भुगतान के लिए उपयोग किया जाने वाला व्यक्तिगत ऋण इनमें से कुछ भी नहीं बनाता. चिंता की वजहें और भी हैं. दस बड़े बैंकों के आरबीआइ अध्ययन के अनुसार, जो इस तरह के लगभग 90 फीसदी ऋण को कवर करते हैं, 10 लाख से कम वार्षिक आय वाले लोग नये स्वीकृत होने वाले कुल ऋणों का करीब तीन-चौथाई हिस्सा थे.

दिसंबर, 2025 में नये एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) में भी उनकी हिस्सेदारी 78 फीसदी थी. यह घरेलू ऋण संकट की शुरुआत का संकेत देता है. विरोधाभास यह है कि कॉरपोरेट ऋण बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे एनपीए अनुपात काफी नीचे आ गया है. लेकिन ऐसे में, यह तथ्य नहीं छिपाया जाना चाहिए कि इस मोर्चे पर जो भी तनाव है, वह अत्यधिक रूप से उन लोगों के बीच केंद्रित है, जिनके पास इसे झेलने की सबसे कम क्षमता है. इस वर्ष जनवरी तक सूक्ष्म वित्त (माइक्रो फाइनेंस) ऋण में लगातार सात तिमाहियों तक गिरावट आयी. उधारकर्ताओं का आधार 22.7 लाख और सिकुड़ गया.

सूक्ष्म वित्त ऋण में गिरावट इसलिए नहीं हुई क्योंकि गरीब परिवारों को कर्ज की आवश्यकता नहीं थी. यह दरअसल नियामक कार्रवाई के कारण हुआ. त्वरित ऋण देने के एक चरण, कई स्थानों से उधार लेने और बढ़ती चूक के कारण सूक्ष्म वित्त उद्योग ने अपने सुरक्षा मानदंड लागू किये. उदाहरण के लिए, कुल सूक्ष्म वित्त और असुरक्षित खुदरा ऋण की सीमा दो लाख रुपये तय की गयी, और 60 दिनों से अधिक की देरी वाले उधारकर्ताओं को ऋण देना प्रतिबंधित कर दिया गया. बैंकों ने भी अपने सूक्ष्म वित्त पोर्टफोलियो में भारी कटौती की. इसलिए ऋण की मांग गोल्ड लोन की ओर स्थानांतरित हो गयी. तथ्य यह है कि मार्च, 2024 से गोल्ड लोन 42.4 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़े हैं, जो समग्र गैर-आवास खुदरा ऋण की गति से लगभग दोगुना है.

रिजर्व बैंक का यह मानना है कि इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा मौजूदा ग्राहकों द्वारा उच्च सोने की कीमतों का उपयोग कर बड़ा ऋण प्राप्त करने और पिछले ऋण को चुकाने/आगे बढ़ाने से आया है. जमानत के कारण लेनदार के लिए असुरक्षित सूक्ष्म वित्त या व्यक्तिगत ऋण की तुलना में गोल्ड लोन अधिक सुरक्षित होता है. हालांकि यह परिवार के लिए अधिक सुरक्षित नहीं है, क्योंकि डिफॉल्ट के मामले में लेनदार गहनों की नीलामी कर सकता है. इस प्रकार, बैंकिंग प्रणाली बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता की रिपोर्ट केवल इसलिए कर सकती है क्योंकि जोखिम को उधारकर्ता परिवार की बैलेंस शीट पर स्थानांतरित कर दिया गया है. सोना अक्सर परिवार का अंतिम आपातकालीन रिजर्व होता है. पिछले ऋणों को चुकाने के लिए इसे बार-बार भुनाना वित्तीय सुदृढ़ता नहीं है. क्या कम बचत महिलाओं को नकद हस्तांतरण के कारण है? महिला-केंद्रित हस्तांतरण 15 राज्यों में 12 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. एक हस्तांतरण घरेलू आय बढ़ाता है, कल्याण और वित्तीय समावेशन में सुधार करता है.

यह आमतौर पर उपभोग, भोजन, स्वास्थ्य सेवा या बच्चों की जरूरतों की ओर जाता है. यह उच्च लागत वाले उधार पर निर्भरता को कम कर सकता है. लेकिन यह कम आय वाले परिवारों की शुद्ध बचत में गिरावट का मुख्य कारण नहीं हो सकता. उभरते हुए व्यापक आर्थिक (मैक्रो इकॉनॉमिक) खतरे को स्वीकार किया जाना चाहिए. ऋण-पोषित उपभोग आज मांग को समर्थन देता है, लेकिन ऋण चुकाना कल के उपभोग को घटा देता है. वित्तीय बचत में गिरावट निवेश को वित्तपोषित करने, बैंक जमाओं और राजकोषीय घाटे को पोषित करने के लिए उपलब्ध घरेलू कोष को कम करती है. सोने की कीमत में गिरावट एक साथ जमानत (कोलेटरल) को कमजोर कर सकती है और उन उधारकर्ताओं को बेनकाब कर सकती है जिन्होंने बार-बार पुनर्वित्त प्राप्त किया है. चूंकि तनाव कम आय वाले परिवारों के बीच केंद्रित है, इसलिए यह असमानता को भी बढ़ा सकता है. इसका समाधान संवेदनशील परिवारों को औपचारिक ऋण से बाहर करना नहीं है.

उपयुक्त विनियमन, उधारकर्ता के कुल जोखिम पर वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करने वाले सक्रिय क्रेडिट ब्यूरो, सूक्ष्म वित्त, व्यक्तिगत और गोल्ड लोन में पुनर्भुगतान का आकलन करने वाले ऋणदाता, ये सब मदद कर सकते हैं. बार-बार गोल्ड-लोन रोलओवर को कम किया जाना चाहिए. संकटग्रस्त उधारकर्ताओं को विश्वसनीय परामर्श और पुनर्गठन विकल्पों की आवश्यकता है. लेकिन ये सभी उपाय केवल लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं. आवधिक ऋण माफी भी, जो कृषि ऋण में सबसे अधिक परिचित हैं, कोई टिकाऊ समाधान नहीं है. वे करदाताओं पर बोझ डालते हैं, पुनर्भुगतान अनुशासन को कमजोर करते हैं और घरेलू आय की अंतर्निहित कमजोरी को दूर करने के लिए कुछ नहीं करते हैं.

अंततः, अत्यधिक घरेलू ऋणग्रस्तता से मुक्ति काफी हद तक मौद्रिक और ऋण नीति के दायरे से बाहर है. इसके लिए वास्तविक मजदूरी में तेज वृद्धि, अधिक सुरक्षित रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जेब से होने वाले खर्च में कमी, और अचानक आय के झटकों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा की आवश्यकता है. ऋण आय और व्यय के बीच एक अस्थायी अंतर को पाट सकता है. यह स्थायी रूप से आय का स्थान नहीं ले सकता. जब परिवारों को साधारण उपभोग को बनाये रखने या पिछले ऋणों को चुकाने के लिए बार-बार उधार लेना पड़ता है, तो वित्तीय समावेशन वित्तीय भंगुरता में बदलने लगता है. यह तब हो रहा है, जब बैंक बैलेंस शीट बेहद स्वस्थ हैं, जबकि नाजुक स्थिति वाले उधारकर्ता अपनी अंतिम वित्तीय सुरक्षा को गिरवी रख रहे हैं, जो दुखद है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)


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लेखक के बारे में

By अजीत रानाडे

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