प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सप्तधारा’ की व्यापक दृष्टि देश के सामने रखी है. विकसित भारत, 2047 की शक्ति को उन्होंने सात प्रमुख धाराओं से जोड़ा-विनिर्माण शक्ति, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था तथा सॉफ्ट पावर. भारतीय सभ्यता में ‘सात’ पूर्णता, विविधता और संतुलन का प्रतीक रहा है. सप्तऋषि, सप्तसिंधु और सात पवित्र धाराओं की परंपरा इसी सांस्कृतिक चेतना को दर्शाती है. इन धाराओं की शक्ति इनके आपसी संबंध में है. तकनीक कृषि को मजबूत करेगी, कृषि प्रसंस्करण उद्योग को गति देगी, उद्योगों को बेहतर परिवहन और ऊर्जा चाहिए, रक्षा शक्ति आत्मविश्वास देगी, हरित अर्थव्यवस्था विकास को टिकाऊ बनायेगी और संस्कृति भारत की पहचान को विश्व तक पहुंचायेगी.
पहली धारा है मैन्युफैक्चरिंग पावर-'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' तक : विकसित भारत की पहली पहचान मजबूत विनिर्माण शक्ति होगी. इसी दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन 2014 के लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ हो गया. मोबाइल फोन का उत्पादन भी 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा. अगस्त तक उद्यम मंच पर 9.16 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीकृत थे और उनसे 40 करोड़ से अधिक रोजगार जुड़े थे. अब लक्ष्य 'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' होना चाहिए. दूसरी धारा है कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण-खेत से बाजार तक : किसान की समृद्धि उपज का अच्छा दाम मिलने से भी होगी. इसके लिए खेती के साथ प्रसंस्करण, भंडारण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष 6,000 रुपये दिये जाते हैं. बीस जून को जारी 23वीं किस्त में 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि 9.44 करोड़ किसानों को दी गयी, जिनमें 2.18 करोड़ महिला किसान हैं. वर्ष 2019 में योजना शुरू होने से अब तक 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक किसानों को सीधे दिये जा चुके हैं. किसान को कृषि उद्यमी बनाना होगा. फल-सब्जियों का प्रसंस्करण, मोटे अनाज, दूध से बने उत्पाद, मसाले, मछली पालन और वनोपज को बेहतर तरीके से तैयार कर, पैक कर और बाजार से जोड़कर गांवों में नये उद्योग, रोजगार और किसानों की अतिरिक्त आय के अवसर पैदा किये जा सकते हैं.
प्रधानमंत्री ने मिलेट्स को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया. मछली उत्पादन 2019-20 में लगभग 142 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है. युवा किसान अब ड्रोन, उपग्रह से मिलने वाली जानकारी, एआइ, मौसम की जानकारी और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल कर खेती को अधिक वैज्ञानिक बना सकते हैं. तीसरी धारा है टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन-उपयोगकर्ता से निर्माता तक : देश में एक अरब से अधिक लोग इंटरनेट से जुड़े हैं और यूपीआइ आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूपीआइ के जरिये होने वाले कुल लेन-देन बढ़कर 24,161.69 करोड़ से अधिक हो गये हैं. इंटरनेट सब्सक्राइबरों की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर मार्च, 2026 तक 109.2 करोड़ से अधिक हो गयी.
इसी अवधि में डाटा की कीमत भी 2014 के 269 प्रति जीबी से घटकर अब आठ रुपये प्रति जीबी रह गयी है. इससे डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा, इ-कॉमर्स, डिजिटल वित्त और नये व्यवसायों के लिए विशाल आधार तैयार हुआ है. इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट, 2026 का आयोजन एक बड़ी उपलब्धि रहा. इस वैश्विक सम्मेलन में करीब छह लाख लोगों ने प्रत्यक्ष भागीदारी की, सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया और 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों की भागीदारी रही. अब भारत को तकनीक का बड़ा बाजार होने के साथ इसका बड़ा निर्माता बनना होगा. निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में उभर रही युवा प्रतिभाएं इस बदलाव की सबसे प्रेरक मिसाल हैं. चौथी धारा है गति शक्ति-तेज भारत, जुड़ा भारत : सड़क, रेल, हवाई और जल संपर्क जितना बेहतर होगा, उतनी तेजी से किसान, उद्योग और बाजार आपस में जुड़ेंगे. राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च, 2026 तक 1,46,572 किलोमीटर हो गयी.
चार लेन और उससे अधिक क्षमता वाले राजमार्ग 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 45,516 किलोमीटर हो गये. रेलवे का बजट भी 2014 के लगभग 32,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है. हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 160 से अधिक हो गयी है. गति शक्ति का लक्ष्य माल परिवहन की लागत घटाना और देश के हर क्षेत्र को आर्थिक अवसरों से जोड़ना है. पांचवीं धारा है रक्षा शक्ति-आत्मनिर्भर सुरक्षा, आत्मविश्वासी भारत : भारत का रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. रक्षा निर्यात भी 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हुआ. भारत अब आधुनिक रक्षा तकनीक और उत्पाद विकसित करने वाला देश भी बन रहा है
छठी धारा है हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था-विकास भी, प्रकृति भी : विकसित भारत का विकास टिकाऊ होना चाहिए. इस अवधारणा के दो प्रमुख स्तंभ हैं. एक है जीरो डिफेक्ट-यानी भारत में बनने वाले उत्पाद उच्च गुणवत्ता वाले होने चाहिए. दूसरा है जीरो इफेक्ट-यानी औद्योगिक उत्पादन का पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना इस विजन का मुख्य आधार है. भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के 2.8 गीगावाट से बढ़कर 31 जुलाई तक 164.59 गीगावाट हो गयी है. ग्रीन हाइड्रोजन, विद्युत वाहन, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा नये उद्योग और रोजगार पैदा कर सकते हैं. दूसरी ओर, समुद्र मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन, समुद्री जैव संपदा और समुद्री तकनीक के माध्यम से देश की नीली अर्थव्यवस्था को नयी शक्ति दी जा सकती है. सातवीं धारा है सॉफ्ट पावर-‘वसुधैव कुटुंबकम’ से विश्व बंधुत्व तक : भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी प्राचीन विरासत के साथ उसके जीवन दर्शन में भी निहित है. योग, आयुर्वेद, संगीत, कला, साहित्य, हस्तशिल्प और आध्यात्मिक परंपरा भारत को विशिष्ट पहचान देते हैं. इसका सबसे व्यापक संदेश है-‘वसुधैव कुटुंबकम’, योग इसका सबसे प्रभावी उदाहरण है. भारत की इस सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्वीकार्यता प्राप्त है.
