भारत विरोध से पाकिस्तान क्रिकेट का नुकसान, पढ़ें अभिषेक दुबे का आलेख

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रस्साकशी क्रिकेट के मैदान में खुलकर सामने आ गयी है. भारत के खिलाफ टी-20 विश्व कप का मैच न खेलने के फैसले से पाक क्रिकेट टीम पूरी तरह अलग-थलग पड़ जायेगी.

टी-20 विश्व कप शुरू होने के पहले से ही पाकिस्तान की क्रिकेट टीम और उसके प्रबंधन ने जिस रवैये का परिचय दिया है, वह उसकी भारत-विरोधी सोच का ही सबूत है. भारतीय क्रिकेट शिखर पर है. जबकि पाकिस्तान क्रिकेट टीम सिफर है. यह दोनों देशों की मौजूदा हालत का प्रतिबिंब है. टी-20 विश्व कप पुरुष टीम अपने खिताब को बनाये रखने के लिए मैदान पर है. हमारी महिला टीम विश्व कप चैंपियन है. अंडर 19 टीम ने धमाकेदार अंदाज में विश्व कप जीता है. आइपीएल भारतीय क्रिकेट का ग्लोबल ब्रांड बन चुका है. भारत विश्व क्रिकेट अर्थव्यवस्था का सुपर पावर है. इस पूरे परिदृश्य में पाकिस्तान का भारत के खिलाफ विश्व कप का मैच न खेलने के फैसले का अवलोकन करना आवश्यक है.

वर्ष 1947 में दो आजाद मुल्क बनने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच हॉकी और क्रिकेट मैच के बीच हर मुकाबले को सुपर हिट मुकाबले के तौर पर देखा गया. दरअसल, इस मुकाबले के रोमांच ने दो पड़ोसी मुल्कों के फैन को असलाह-बारूद के बिना युद्ध का रोमांच दिया. इसके इर्द-गिर्द एक बड़ा बाजार बना. इस बीच हॉकी में पाकिस्तान का किला पूरी तरह से ढह गया. क्रिकेट में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट संस्था ने हर विश्व कप में भारत और पाकिस्तान को एक ग्रुप में रखकर और मुकाबला कराकर इस बाजार को भुनाने की पुरजोर कोशिश की. लेकिन बीते लगभग एक दशक में इन दोनों टीमों के बीच क्रिकेट के अधिकतर मुकाबले एकतरफा होते चले गये. ऐसे में, इन दोनों देशों के बीच होने वाले क्रिकेट मैच को महामुकाबला कहना पूरी तरह से बेमानी है. भारत और पाकिस्तान के लोगों में भी बदलते वक्त के साथ भारी बदलाव आया है. अब दो तिहाई भारतीय युवा हैं. ये 1947 के पहले के हालात से वाकिफ नहीं है.

हमारी युवा पीढ़ी पाकिस्तान को हमेशा भारत का प्रतिद्वंद्वी, आतंकवाद को हवा-पानी देने वाला और एक हमलावर देश मानती है. भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा खिलाड़ी से लेकर कोच और सपोर्ट स्टाफ इसी युवा आबादी से आते हैं. पहले के खिलाड़ियों के विपरीत, इनमे पाकिस्तान को लेकर किसी तरह की हमदर्दी नहीं, बल्कि नफरत है. सीमा के उस पार भी इंडियन प्रीमियर लीग से पूरी तरह से महरूम होने के बाद पाकिस्तान के खिलाड़ी और प्रशंसक पहले दुखी और अब पूरी तरह से हताश हैं. इस बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रस्साकशी क्रिकेट के मैदान में खुलकर सामने आ गयी है. पहले, भारतीय क्रिकेटर ने मैच से पहले पाकिस्तान क्रिकेटर से हाथ मिलाने से मना कर दिया. कैमरे के पीछे उन्होंने कहा कि हम ऐसे मुल्क के लोगों से कैसे हाथ मिला सकते हैं, जो हमारे निहथे लोगों को मारते हैं. फिर, भारतीय टीम ने पाकिस्तान के मंत्री के हाथों एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया. इस बीच बांग्लादेश टीम ने विश्व कप के लिए भारत न आने का फैसला किया.

इस फैसले ने पाकिस्तान के हुक्मरान को ओछी राजनीति करने का मौका दिया. भारत को चोट देने के लिए ये ऐसे मुल्क का साथ देने का छद्म रच रहे हैं, जिस मुल्क का जन्म उसके दमन और अत्याचार की वजह से हुआ. अब सवाल यह उठता है कि अगर पाकिस्तान विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए भारत नहीं आता है, तो इसके तत्काल और दूरगामी परिणाम क्या होंगे. पहली बात तो यह कि ब्रॉडकास्टर को इससे घाटा होगा. दूसरा, ऐसे में, अंतराष्ट्रीय क्रिकेट संस्था कई तरह के कदम उठा सकती है. तीसरा, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ आने से एशिया कप पर असर पड़ेगा. चौथा, भारत और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के बीच तनाव और बढ़ेगा तथा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड कुछ और देशों को लामबंद करने की कोशिश कर सकता है. लेकिन अगर हम इसके दीर्घकालीन असर की बात करें, तो साफ तौर पर पाकिस्तान और पाकिस्तान के साथ आने वाले देशों का क्रिकेट पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जायेगा.

भारत विश्व क्रिकेट की अर्थव्यवस्था का सुपर पावर है. भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं का खजाना है. भारत के पास इंडियन प्रीमियर लीग के तौर पर ग्लोबल ब्रांड है. भारतीय फ्रेंचाइजी दूसरे देशों की क्रिकेट लीग के मालिक हैं. जाहिर है, यह स्थिति रातोंरात नहीं बनी है और किसी कमजोर मुल्क की गंदी राजनीति इसे रातोंरात नहीं बदल सकती है. पाकिस्तान के भारत न आने से भारत बनाम पाकिस्तान के बीच सुपर हिट मुकाबले का बचा हुआ गुब्बारा पूरी तरह से फूट जायेगा. जाहिरा तौर पर मजबूत भारतीय क्रिकेट से संबंधित बाजार दूसरा रास्ता निकाल लेगा. अगले विश्व कप से भारत और ऑस्ट्रेलिया या फिर इंग्लैंड या न्यूजीलैंड की टीम एक पूल में होगी और ये पाकिस्तान की क्रिकेट टीम से बहुत आगे हैं. विश्व क्रिकेट की अहम धुरी भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड हैं, और इस धुरी को तोड़ना पाकिस्तान के लिए नामुमकिन है. वैसे में, पाकिस्तान की क्रिकेट टीम और अलग-थलग पड़ जायेगी तथा वहां की क्रिकेट का वही हश्र हो सकता है, जो हॉकी का हुआ. भारतीय क्रिकेट दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत का प्रतिबिंब है. जबकि पाकिस्तान का क्रिकेट उस देश की बदहाली को ही बयान करता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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