अंतरिक्ष में सफलता

ISRO : मिशन की सफलता के बाद इसरो ने एक्स पर इसे ऐतिहासिक क्षण बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिशन की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी.

ISRO : अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इतिहास रचने का सिलसिला जारी है. गुरुवार को इसरो ने स्पैडेक्स मिशन के तहत अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को आपस में जोड़ कर(डॉकिंग) नया मुकाम हासिल कर लिया और ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया. यह भारत की अंतरिक्ष में ऊंची उड़ान है. भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन ने ही यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है.

मिशन की सफलता के बाद इसरो ने एक्स पर इसे ऐतिहासिक क्षण बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिशन की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी. बीते वर्ष 30 दिसंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रात 10 बजे स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैडेक्स) मिशन के तहत दो अंतरिक्ष यान- चेजर (एसडीएक्स01) और टार्गेट (एसडीएक्स02)- को पीएसएलवी सी60 रॉकेट की सहायता से लॉन्च किया गया था. लॉन्चिंग के अगले ही दिन रॉकेट ने दोनों यानों की पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया.

सात और नौ जनवरी को तकनीकी कारणों से दोनों यानों के आपस में जोड़ने की प्रक्रिया को टाल दिया गया था, मगर आखिरकार 16 जनवरी को इसरो ने इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर भारत के आगामी कई अभियानों की नींव रख दी. विदित हो कि इसरो के लिए दो अंतरिक्ष यानों को आपस में जोड़ने में कामयाबी हासिल करना इसलिए जरूरी था, क्योंकि भारत के कई अंतरिक्ष मिशनों की सफलता इसी पर निर्भर है. इसरो चंद्रयान-4 में इस तकनीक का इस्तेमाल करेगा, जिसमें चंद्रमा से नमूने धरती पर लाये जायेंगे. स्पेस स्टेशन बनाने और उसके बाद वहां जाने और वहां से वापस आने के लिए भी अंतरिक्ष यानों को जोड़ने की तकनीक की आवश्यकता होगी. इतना ही नहीं, गगनयान अभियान के लिए भी यह तकनीक जरूरी है.

इस अभियान के जरिये मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाना है. इसके साथ ही सैटेलाइट सर्विसिंग, इंटरप्लेनेटरी मिशन और मनुष्य को चंद्रमा पर भेजने में भी इस तकनीक का उपयोग किया जायेगा. यह तकनीक उन अभियानों को पूरा करने के लिए जरूरी है, जिनमें भारी अंतरिक्ष यान की जरूरत होती है और जिन्हें एकल प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में नहीं भेजा जा सकता. यह एक जटिल अभियान था. अंतरिक्ष में उपग्रह बहुत तेजी से घूमते हैं, पर उन्हें आपस में जोड़ने के लिए दोनों को समान गति से घूमना होता है. इसके लिए काफी सावधानी की जरूरत होती है. जरा-सी चूक पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. अपने सीमित संसाधन के जरिये इसरो द्वारा हासिल यह कामयाबी प्रशंसनीय है. इसरो ने देशवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है.

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