निवेश के लिए सबसे फायदेमंद है सोना

Gold Investment: सोने में अधिकतम 34.1 प्रतिशत, जबकि इक्विटी में अधिकतम 14.6 फीसदी का रिटर्न मिला है. ये आंकड़े स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि सोने में निवेश करना इक्विटी में निवेश करने की तुलना में अधिक फायदेमंद है. इस सर्वे ने इस प्राचीन धारणा को और पुष्ट ही किया है कि सोना खरीद कर रखना शुभ और लाभकारी है.

Gold Investment: आईआईएम, अहमदाबाद के इंडियन गोल्ड पॉलिसी सेंटर द्वारा कराये गये हालिया सर्वे के अनुसार कीमतों में तेजी के कारण सोने ने पिछले 20 वर्षों के हर कालखंड में निवेशकों को इक्विटी की तुलना में ज्यादा मुनाफा दिया है. इतना ही नहीं, इक्विटी और सोना, दोनों में निवेश करने पर सोने ने निवेशक के जोखिम को भी कम किया है. सोने में निवेश बढ़ने का यह एक कारण है. सोने और इक्विटी में निवेश के अंतर को इस आंकड़े से समझा जा सकता है. सोने में एक साल तक निवेश करने पर 34.1 फीसदी, तीन साल तक निवेश करने पर 16.8 प्रतिशत, पांच साल तक निवेश करने पर 14.8 फीसदी, 10 साल निवेश करने पर 12.5 प्रतिशत, 15 साल निवेश करने पर 11.5 फीसदी और 20 साल तक निवेश करने पर 12.9 प्रतिशत का रिटर्न मिला है. दूसरी ओर, इक्विटी में एक साल निवेश करने पर 2.6 फीसदी, तीन साल तक निवेश करने पर 11.6 फीसदी, पांच साल निवेश करने पर 14.6 प्रतिशत, 10 साल निवेश करने पर 9.9 फीसदी, 15 साल निवेश करने पर 11.5 प्रतिशत और 20 साल तक निवेश करने पर 12.3 फीसदी रिटर्न मिला है.

इस आंकड़े के अनुसार, सोने में अधिकतम 34.1 प्रतिशत, जबकि इक्विटी में अधिकतम 14.6 फीसदी का रिटर्न मिला है. ये आंकड़े स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि सोने में निवेश करना इक्विटी में निवेश करने की तुलना में अधिक फायदेमंद है. इस सर्वे ने इस प्राचीन धारणा को और पुष्ट ही किया है कि सोना खरीद कर रखना शुभ और लाभकारी है. इंडियन गोल्ड पॉलिसी सर्वे के मुताबिक, सोने में 56 प्रतिशत ऐसे लोग निवेश करते हैं, जिनकी सालाना आय दो से 10 लाख रुपये के बीच है. इधर, 2022 से मार्च, 2025 के दौरान सोने की कीमत दोगुनी हो गयी है, लेकिन इस आय वर्ग के लोगों की बचत में कोई इजाफा नहीं हुआ है. ऐसे में, ये लोग मौजूदा समय में सोना खरीद पाने में असमर्थ हैं. जिस तेजी से सोने के दाम बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए इस साल इसके एक लाख रुपये का स्तर पार करने की प्रबल संभावना है. ऐसे में, आमजन के लिए सोना खरीद पाने की संभावना कम हो रही है. यही नहीं, बजट बिगड़ने के डर से वे शादी में भी सोने के आभूषण खरीदने से परहेज कर रहे हैं.

मौजूदा हालात से आभूषण उद्योग भी चिंतित है, क्योंकि बढ़ी कीमतों के कारण आभूषण की मांग में कमी आयी है. मौजूदा संकट से निपटने के लिए सोने के आभूषण निर्माता 14 कैरेट सोने की बिक्री बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, साथ ही साथ नौ कैरेट सोने की हॉलमार्किंग के लिए भी प्रयास किये जा रहे हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 में सोने की मांग सबसे अधिक थी. काउंसिल के मुताबिक, 2023 की मार्च तिमाही में 34.8 टन सोना नकदी के लिए बेचा गया, जबकि मार्च 2024 में 38.3 टन सोना बेचा गया. चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 40 टन से अधिक सोना बेचे जाने की संभावना है. आजादी के 75 वर्षों में सोने की कीमत आसमान पर पहुंच गयी है. उल्लेखनीय है कि इस साल भी भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन टन सोना खरीदा है, जिससे सोने का भंडार बढ़कर 879 टन हो गया है. दरअसल विश्व के कुछ भागों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण सोने की कीमत बढ़ रही है. गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़ने से सोने की मांग हाल में बढ़ी है. शेयर बाजार में जैसी गिरावट पिछले दिनों देखी गयी, उससे भी निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ा. रहा है. महंगाई का डर भी अभी बरकरार है. हालांकि देश में खाद्य वस्तुओं की कीमत घटने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दर फरवरी महीने में सात महीने के निचले स्तर पर-यानी 3.61 प्रतिशत पर आ गयी, लेकिन इसे स्थायी नहीं माना जा सकता है. गर्मियों में सब्जियों की कीमत में फिर से वृद्धि होने के आसार हैं.

भारत सोने की मांग की घरेलू आपूर्ति करने में असमर्थ है, क्योंकि यहां अपेक्षित मात्रा में सोने का उत्पादन नहीं होता. इस मामले में हमारा देश पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर है. वर्ष 2024 के 11 महीनों में भारत ने कुल 47 अरब अमेरिकी डॉलर का सोना आयात किया था, जो अब तक का उच्चतम स्तर है, जबकि 2023 में भारत ने 42.6 अरब डॉलर का सोना आयात किया था. दुनिया में सबसे ज्यादा सोना चीन खरीदता है. उसने 2023 में 224.88 मीट्रिक टन सोना खरीदा था, जबकि तुर्की दूसरे स्थान पर था. मौजूदा वैश्विक अनिश्चिताओं, विश्व के कुछ भागों में भू-राजनीतिक तनाव के बने रहने, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदा नीतियों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौजूदा रुख तथा अमेरिका में मंदी आने की आशंका, रुपये के डॉलर की तुलना में कमजोर होने जैसे कारणों से सोने की कीमत में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है, जो आमजन के लिए भले मुफीद नहीं, लेकिन ऐसी स्थिति उच्च आय वाले निवेशकों के लिए तुलनात्मक रूप से निश्चय ही लाभदायक है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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