बढ़ता क्षेत्रीय सहयोग

हाल के वर्षों में जापान समेत अनेक देशों से आ रहे लगातार निवेश से इंगित होता है कि भारत की आर्थिक संभावनाओं में भरोसा बढ़ रहा है.

यूक्रेन संकट और अन्य वैश्विक भू-राजनीतिक हलचलों के बीच जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की भारत यात्रा तथा उसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की वर्चुअल शिखर बैठक महत्वपूर्ण घटनाएं हैं. ये तीनों देश और अमेरिका क्वाड समूह के सदस्य हैं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं विकास के लिए प्रयासरत हैं.

इस क्षेत्र में चीन अपने वर्चस्व के विस्तार की कोशिश में है, जबकि भारत की प्राथमिकताओं में व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामुद्रिक सुरक्षा हैं. वर्तमान परिस्थितियों में, जहां देशों के परस्पर संबंधों का समीकरण संशोधित हो रहा है, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के महत्व को फिर रेखांकित किया है. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री किशिदा ने पिछले साल अक्तूबर में कार्यभार संभालने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा के लिए भारत को चुना.

इस यात्रा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि महामारी के कारण बीते दो वर्ष वार्षिक शिखर बैठकें आयोजित नहीं हो सकीं तथा 2019 की प्रस्तावित वार्ता रद्द हो गयी थी. यह वर्ष भारत-जापान संबंधों के 70 वर्ष पूरा होने का अवसर भी है. साल 2014 में जापान ने 3.5 ट्रिलियन जापानी येन भारत में निवेशित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जो पूरा हो चुका है.

अब पांच ट्रिलियन येन के निवेश का प्रस्ताव है. चीनी वर्चस्व के बरक्स एशिया की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का बढ़ता सहयोग महादेश की समृद्धि में बड़ा योगदान कर सकता है. हाल के वर्षों में जापान समेत अनेक देशों से लगातार निवेश भारत आ रहा है, जिससे इंगित होता है कि भारत की आर्थिक व वित्तीय संभावनाओं में भरोसा बढ़ रहा है.

भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों ने भी ठोस द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया है. उल्लेखनीय है कि यूक्रेन और रूस के प्रकरण में जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत की राय में भिन्नता है, परंतु यह पहलू आपसी संबंध और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मामलों पर हावी नहीं हुआ. प्रधानमंत्रियों ने यूक्रेन संकट के क्षेत्रीय प्रभाव पर भी चर्चा की है.

कुछ समय बाद जापान में क्वाड शिखर वार्ता में इन नेताओं की मुलाकात होगी. इन वार्ताओं ने परस्पर संबंधों को नये सिरे से गढ़ने का अवसर भी मुहैया कराया है क्योंकि महामारी के साये से निकलते विश्व की आवश्यकताओं का हिसाब बदला है तथा भू-राजनीति आर्थिक संबंधों को प्रभावित करती दिख रही है.

जापान और भारत के साझा बयान में भारत पर हो रहे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमलों की निंदा की गयी है तथा अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की बात कही गयी है. प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और तनावों को शांति से सुलझाने पर बल दिया है. मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ शिखर वार्ता के बाद जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों से हुई बैठकों से सिद्ध होता है कि वैश्विक परिदृश्य में भारत का महत्व निरंतर बढ़ता जा रहा है.

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Published by: संपादकीय

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