देश में शोध और नवाचार का नया दौर

Research And Innovation : भारत ने शोध व नवाचार में पिछले एक दशक में तेजी से कदम बढ़ाये हैं. विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआइपीओ) द्वारा प्रकाशित ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआइआइ), 2024 की रैंकिंग में 133 अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने 39वां स्थान हासिल किया है.

Research And Innovation : हाल ही में प्रधानमंत्री ने भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी इनोवेशन कॉन्क्लेव (एस्टिक), 2025 का शुभारंभ करने के साथ एक लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (आरडीआइ) फंड लॉन्च करते हुए कहा कि यह फंड देश के अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा बल देगा. इस फंड के माध्यम से सरकार निजी क्षेत्र को तकनीकी शोध, स्टार्टअप, इनोवेशन और औद्योगिक विकास में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगी. चूंकि भारत अब टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी के जरिये ट्रांसफॉर्मेशन का नेतृत्वकर्ता बन चुका है, अतएव आरडीआइ फंड से विज्ञान, उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग को नयी मजबूती मिलेगी और विज्ञान के वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत आगे बढ़ सकेगा.


गौरतलब है कि आरडीआइ फंड के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को नोडल मंत्रालय बनाया गया है. यह कोष सीधे कंपनियों और स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करेगा. फंडिंग का काम दूसरे फंड मैनेजरों द्वारा किया जायेगा. खास बात यह है कि इस फंड के तहत फंडिंग के तरीकों में कम या शून्य ब्याज दर पर दीर्घकालीन ऋण, पूंजी प्रदाय और डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स में योगदान प्रमुख रूप से शामिल हैं. इस फंड में शोध और नवाचार के लिए जिन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा, उनमें मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायो-मैन्युफैक्चरिंग, ब्लू इकोनॉमी, डिजिटल कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण, उभरती कृषि तकनीक, ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु, स्वास्थ्य व चिकित्सा तकनीक, क्वांटम विज्ञान व अंतरिक्ष तकनीक शामिल हैं.

चूंकि अपने यहां सरकार और निजी क्षेत्र का शोध व विकास में निवेश पिछले लंबे समय से चिंता का विषय रहा है, इसलिए अब एक लाख करोड़ रुपये का आरडीआइ फंड अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण है. अभी देश के जीडीपी में शोध व विकास की हिस्सेदारी करीब 0.70 फीसदी है, जो अमेरिका, जापान और चीन जैसे देशों की दो से पांच फीसदी हिस्सेदारी के मुकाबले बहुत कम है. अतएव आरडीआइ फंड से शोध के रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों को जरूरी जोखिम पूंजी प्राप्त होगी.


हालांकि भारत ने शोध व नवाचार में पिछले एक दशक में तेजी से कदम बढ़ाये हैं. विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआइपीओ) द्वारा प्रकाशित ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआइआइ), 2024 की रैंकिंग में 133 अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने 39वां स्थान हासिल किया है. जबकि 2015 में भारत 81वें स्थान पर था. देश के प्रमुख शहर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई दुनिया के शीर्ष 100 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टरों में सूचीबद्ध हैं तथा भारत अमूर्त संपत्ति तीव्रता में वैश्विक स्तर पर सातवें स्थान पर है. यदि हम बौद्धिक संपदा, शोध एवं नवाचार से जुड़े अन्य वैश्विक संगठनों की रिपोर्टें देखें, तो पाते हैं कि भारत इस क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा हैं. देश में शोध एवं नवाचार को बढ़ाने में डिजिटल ढांचे और डिजिटल सुविधाओं की भी अहम भूमिका है. भारत आइटी सेवा निर्यात और वेंचर कैपिटल हासिल करने के मामले में आगे बढ़ रहा है. विज्ञान और इंजीनियरिंग ग्रेजुएट तैयार करने में भी भारत सबसे आगे है.

देश के उद्योग-कारोबार समय के साथ आधुनिक हो रहे हैं. विज्ञान व प्रौद्योगिकी का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग कर भारत कृषि विकास की डगर पर तेजी से आगे बढ़ा है. देश के लिए बौद्धिक संपदा, शोध एवं नवाचार के बहुआयामी लाभ लगातार बढ़ रह हैं. देश में इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमता और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में शोध एवं विकास और जबरदस्त स्टार्टअप माहौल के चलते अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने ग्लोबल इन हाउस सेंटर (जीआइसी) तेजी से शुरू कर रही हैं. ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में तेजी से बढ़ने से भारत में ख्यातिप्राप्त वैश्विक फाइनेंस और कॉमर्स कंपनियां अपने कदम तेजी से बढ़ा रही हैं.

शोध एवं नवाचार बढ़ने से देश में एफडीआइ में वृद्धि हो रही है. इसके बावजूद बौद्धिक संपदा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्रों में ऊंचाई हासिल करने के लिए सरकार व निजी क्षेत्र का परिव्यय बढ़ाना होगा. छह-सात दशक पहले अमेरिका ने आरएंडडी पर तेजी से अधिक खर्च कर सूचना प्रौद्योगिकी, संचार, दवाओं, अंतरिक्ष अन्वेषण, ऊर्जा और अन्य तमाम क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़कर दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनने का अध्याय लिखा. हमें अपने औद्योगिक ढांचे में बदलाव लाना होगा, कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बदलाव को आकार देना होगा, अपनी कंपनियों पर प्रतिस्पर्धी होने का दबाव बनाने के लिए व्यापार नीति का इस्तेमाल करना होगा तथा सार्वजनिक शोध प्रणाली में परिवर्तन करना होगा.


उम्मीद करें कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक लाख करोड़ रुपये के शोध, विकास और नवाचार के जिस आरडीआइ फंड को लॉन्च किया गया है, उसके पूरे उपयोग के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ा जायेगा. उम्मीद करें कि आरडीआइ फंड के माध्यम से मुश्किलों का सामना रही भारतीय प्रतिभाओं को भारत लाकर शोध और नवाचार को आगे बढ़ाते हुए देश के विकास के नये अध्याय लिखे जायेंगे.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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