देश के भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल 1856 अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा केंद्र सरकार को नहीं िदया है. सरकार ने इस साल जनवरी के आखिर तक इन अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने को कहा था. संपत्ति का ब्यौरा नहीं देने से उन अधिकारियों पर शक होता है. मांगी हुई जानकारी देना भी सरकारी कामकाज का हिस्सा है.
देश में लेन-देन व कारोबार स्वच्छ होना चाहिए, ऐसी मंशा का अभाव उन अधिकारियों में दिखता है. इन अधिकारियों के घर, दफ्तर जैसे जगहों पर छापे मारकर उनकी संपत्ति को सरकारी हिरासत में लेना जरूरी है. केंद्र सरकार के निर्देश का पालन न करने से क्या हो सकता है, यह बात पूरे देश में जायेगी तो सभी अधिकारियों की चेतना जग सकती है.
वैजयंती सूर्यवंशी, इमेल से
