सेवा और सामानों पर लगनेवाले कर में इतना अंतर नहीं होना चाहिए कि देश के हर प्रदेश में किसी एक चीज के लिए ही लोगों को अलग-अलग मूल्य चुकाना पड़े. सेवा और सामान पर कराधान के मामले में राज्यवार विभिन्नता को स्वीकार करनेवाली मौजूदा प्रणाली कालाबाजारी और कर चोरी को बढ़ावा देती है, यह एक स्थापित तथ्य है. कराधान की नयी प्रणाली गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) इसी कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह वस्तुओं और सेवाओं पर लगनेवाले तमाम तरह के करों को एक में समाहित करते हुए मूल्यों में प्रदेशवार एकरूपता स्थापित करने की कोशिश है.
कर उगाही के दायरे को बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को गति देनेवाले इस कदम की सबसे बड़ी चुनाती क्रियान्वयन के स्तर पर है और खबरों के मुताबिक सरकार ने शुरुआती उलझनों को दूर करते हुए अब राज्यों के सहयोग से इस दिशा में फैसलों को ठोस रूप देने का काम शुरू किया है. जीएसटी काउंसिल की हालिया बैठक में सोना और बीड़ी जैसी कुछ चीजों को छोड़ कर अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र के उत्पाद के लिए जीएसटी तय कर लिया गया है. तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार के लिहाज से देखें, तो अच्छी बात यह है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों को जीएसटी काउंसिल ने 18 फीसद वाले कर-दायरे में रखा है.
फिलहाल इन चीजों पर केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से आयद अलग-अलग करों काे मिला कर उपभोक्ताओं को मूल्य पर 22-24 फीसदी कर देना होता था. व्यापक उपभोग की इन चीजों के दाम कम होने से उपभोक्ताओं और उत्पादक कंपनियों दोनों को फायदा होगा. दूध और अनाज आदि को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है. यह संकेत है कि भोजन और पोषण से संबंधित चीजों को लेकर सरकार लोक-कल्याणकारी राज्य के नजरिये से सोच रही है.
पंखे, रेफ्रिजिरेटर और एसी जैसी कुछ चीजों के दाम बढ़ेंगे, क्योंकि इन्हें जीएसटी की ऊंची श्रेणी (28 फीसदी कराधान) में रखा गया है, लेकिन यहां ध्यान रखना होगा कि पूंजीगत सामान और औद्योगिक उपयोग की मध्यवर्ती चीजों पर 18 फीसदी का कराधान किया गया है, जो कि अपेक्षा से कम है और इससे उत्पादन को निश्चित रूप से बढ़ावा मिलेगा.
नये कराधान से दो पहिया वाहनों की कीमतें कम हो सकती हैं और चार पहिया वाहन की कीमतें तकरीबन मौजूदा स्तर पर रहेंगी. देश जीएसटी को लेकर शुरुआती आशंकाओं से उबर चुका है. उम्मीद है कि अगले साल के बजट में वित्तमंत्री के पास जीएसटी की कामयाबी के बारे में कहने के लिए बहुत कुछ होगा.
