झारखंड सरकार वित्तीय वर्ष जनवरी से दिसंबर करने की सोच रही है. इसके अपने आर्थिक कारण हो सकते हैं. यदि शैक्षणिक सत्र को भी जनवरी से दिसंबर कर दिया जाये, तो यह बहुत तरह से लाभकारी होगा. पूर्व में भी ऐसी व्यवस्था थी. मार्च – अप्रैल सत्र में काफी परेशानियां होती हैं.
सरकारी विद्यालयों में नामांकन अभियान पूरे अप्रैल माह तक चलता रहता है. मौसम काफी गर्म होने के कारण विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां बच्चों के स्वास्थ्य के प्रतिकूल होती हैं. पुस्तक वितरण के बाद बच्चे पुस्तकों से ठीक तरह रूबरू भी नहीं हो पाते और अगले माह ग्रीष्मकालीन अवकाश हो जाता है. जनवरी से सत्र होने पर बच्चे और शिक्षक लगभग आधे पाठ्यक्रम पूरा कर सकते हैं और ग्रीष्मावकाश का भी सदुपयोग भी होगा.
जयंत कुमार तिवारी, चतरा
