पूरे देश में स्वार्थ की राजनीति हावी है. अपना नफा नुकसान देख कर हमारे नेतागण कपड़े की तरह पार्टी बदलने लगे हैं. देखा जाए तो भाजपा अभी जीत के रथ पर सवार है, इसलिए लगभग सभी पार्टियों के नेता भाजपा का रुख कर रहे हैं. उनके अपने राजनीतिक ऊसूल बदल जाते हैं.
उन्हें अचानक ज्ञान प्राप्त हो रहा है कि इतने दिन वे गलत पार्टी में थे. अगर दलबदलू नेताओं पर जांच बैठा दी जाये, तो दल बदलने का सच सामने आ जायेगा. दल बदलने की अपनी इच्छा को जनता की इच्छा बता कर सुख भोगने वाले नेताओं का सच जनता के सामने आना जरूरी है. सवाल उठता है कि ऐसी जांच कौन करेगा? अत: जनता को ही जागरूक होकर वोटों के द्वारा नेताओं के छल का जवाब देना होगा.
राजन राज, रांची
