वर्षों से हमारा देश आतंकवाद और नक्सलवाद से ग्रस्त है़. आतंकवाद तो बाहरी तत्वों द्वारा प्रायोजित है, पर नक्सलवाद हमारी आंतरिक राजनीतिक विफलता है. राजनीतिक दलों का उद्देश्य सिर्फ चुनाव जीतना रह गया है.
गरीबी और बेरोजगारी ने नक्सलवाद को जन्म दिया है. इसका जिम्मेवार हमारा भ्रष्ट शासन तंत्र है. सुकमा में हमारे बहादुर जवान शहीद हो गये, पर कैसी विडंबना है कि हमारी सरकार कुछ नहीं कर पा रही है. सरकार के द्वारा रटा-रटाया बयान आता है कि जवानों की शहादत बेकार नहीं जायेगी, मगर वास्तव में होता क्या है?
सरकार से आग्रह है अब तो विकास की इच्छाशक्ति दिखाए. सिर्फ चुनाव जीतने के लिए विकास के झूठे सपने दिखाने बंद करे. सरकार कहती है, कल्याणकारी योजनाओं के लिए करोड़ों का फंड जारी किया गया है, पर फंड जाता कहां है? इस पर सरकार सोंचे. केवल नक्सलियों को कोसने से कुछ नहीं होगा.
धीरज कुमार, रांची
