क्या हम इसे रोक नहीं सकते

पतरातू में बरात ले जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी. दर्जनों लोग घायल हो गये. सात लोग मरे भी. यह दुखद है, मगर क्या इसे टाला नहीं जा सकता था? हम बराती के नाम पर बसों में लदना नहीं छोड़ सकते? यह आम दृश्य है कि बरात वाली बसों में तिल रखने की भी जगह […]

पतरातू में बरात ले जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी. दर्जनों लोग घायल हो गये. सात लोग मरे भी. यह दुखद है, मगर क्या इसे टाला नहीं जा सकता था? हम बराती के नाम पर बसों में लदना नहीं छोड़ सकते?
यह आम दृश्य है कि बरात वाली बसों में तिल रखने की भी जगह हम नहीं छोड़ते. बस के ऊपर भी भीड़ बन कर सवार हो जाते हैं. ऊपर से शराब भी आम दिनों से ज्यादा पी लेते हैं. बस का ड्राइवर भी उसमें शामिल हो जाता है और हम इस बात की भी फिक्र नहीं करते, बल्कि हम शराब को अपनी संस्कृति और भगवान का प्रसाद का नाम दे देते हैं. यह गलत है. अगर हम अपने व्यवहार और सोच नहीं बदलेंगे, तो ऐसी घटनाओं को कभी रोक नहीं सकेंगे.
सुशील बरला, बचरा

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