कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. इससे भारत पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है. इससे पाकिस्तान की नीति और नियति का पता चलता है कि वहां की सरकार निर्वाचित जनतंत्र की भ्रम पैदा करती है, लेकिन फौजी तानाशाही जनतंत्र पर हावी है.
जाधव को मौत की सजा सुना कर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है साथ ही राजनयिक परंपरा की भी अनदेखी की है. हमारे संसद में इस घटना पर केवल वार्तालाप हो रही है. इसको लेकर क्या पहल हो रही है इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं आयी है. जरूरी है, भारत कड़ा रुख अपनाये. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी दबाव बनाने के लिए तैयार करे. अभी इस माहौल में अमन की आशा नजर नहीं आती.
सुमित कुमार बड़ाईक, सिसई
