राम मंदिर विवाद को सुलझाने में अदालत भी असमर्थ है, ऐसा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मान रहे हैं. ऐसे हालात में इस विवादित जगह पर अगर सरकार एक ऐसे विद्या मंदिर का निर्माण कराये, जिसमें सभी धर्म के बच्चों को एक समान शिक्षा मिले, तो इस विवाद का इससे अच्छा निराकरण दूसरा कोई हो नहीं सकता.
देश की सवा सौ करोड़ जनता भी इस निर्णय का तहे दिल से स्वागत करेगी, इसका भरोसा है. देश हित में ऐसा फैसला सिर्फ मोदी सरकार ले सकती है. नोटबंदी का फैसला लेने वाली मोदी सरकार के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं होगी, क्योंकि देश को बहुत दिनों बाद एक ऐसी सरकार मिली है, जो सही अर्थ में देश के लिए कुछ करना चाह रही है.
पारो शैवलिनी, आसनसोल
