बढ़ता तापमान पूरी मानवता के लिये खतरा

साल दर साल गर्मी नये कीर्तिमान स्थापित करते चली जा रही हैं. भले ही ग्लोबल वार्मिंग में कुछ देशों का योगदान ज्यादा हैं, पर पृथ्वी का बढ़ता तापमान पूरी मानव जाति के लिये खतरे की घंटी है. अभी भी मनुष्य चेत जाये नहीं तो विकास के नाम पर प्रकृति से हो रहे छेड़-छाड़ का खामियाजा […]

साल दर साल गर्मी नये कीर्तिमान स्थापित करते चली जा रही हैं. भले ही ग्लोबल वार्मिंग में कुछ देशों का योगदान ज्यादा हैं, पर पृथ्वी का बढ़ता तापमान पूरी मानव जाति के लिये खतरे की घंटी है. अभी भी मनुष्य चेत जाये नहीं तो विकास के नाम पर प्रकृति से हो रहे छेड़-छाड़ का खामियाजा मानव को अपने विनाश से ही चुकाना पड़ सकता है.
पृथ्वी की विनाश लीला किसी प्रलय से कम न होगी और उसके लिये पूरी तरह जिम्मेदार हम होंगे. पूरी मनुष्य जाति अपने सर्वांगीण विनाश की ओर अग्रसर है. कहीं ऐसा न हो कि मनुष्य की लापरवाही अधिक बढ़ जाये और उसको संभलते बहुत देर हो जाये, तब चाह कर भी वह कुछ नहीं कर पायेगा.
सीमा साही ,बोकारो

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