आज से सौ साल से भी अधिक समय से महिला दिवस मनाने कि शुरुआत हुई थी. इतने सालों के बाद भी महिला एवं पुरुष के बीच असमानता है. जहां एक ओर देश की कई बेटियां सायना नेहवाल, मेरीकाॅम, दीपिका कुमारी इस समाज के लिए आइना बन चुकी हैं, वहीं दूसरी तरफ हर दिन न जाने कितनी बेटियां – महिलाएं घरेलू हिंसा, सामाजिक असुरक्षा और प्रताड़ना का शिकार होती जा रही हैं. महिलाओं को शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की बात खूब होती है, मगर अमल में दिखती नहीं है. ज्यादा जरूरी है हर घर के बेटे को शिक्षित, समझदार और संस्कारी बनाया जाए.
दिवाकर कुमार, चतरा
