महत्वपूर्ण विभागों में करीब 2.80 लाख नये कर्मचारी बहाल करने का केंद्र सरकार का प्रस्ताव सराहनीय है. लंबे समय से कम कर्मचारी होने की समस्या से जूझ रहे पुलिस, आयकर और कस्टम व एक्साइज जैसे विभागों में 1.80 लाख लोग भरती किये जायेंगे. नोटबंदी के बाद बड़ी संख्या में संदिग्ध खातों की जांच को लेकर आयकर विभाग के कार्यरत लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर काम के बोझ की शिकायत थी. वर्तमान में इस विभाग के लिए 72 हजार कर्मचारी रखने की मंजूरी है, पर 30 फीसदी सीटें खाली हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देशभर में लगभग 23 फीसदी पुलिसकर्मियों की कमी है.
संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुशंसित अनुपात हर 450 लोगों के लिए एक पुलिसकर्मी का है, जबकि 2015 में भारत में यह औसत 709 लोगों के एक पुलिसकर्मी का था. यही हाल सीमा-शुल्क और आबकारी विभागों का है. उम्मीद है कि नयी भरतियों से दशा में समुचित सुधार होगा. अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, कैबिनेट सचिवालय, सूचना एवं प्रसारण और विदेश मामलों से जुड़े विभागों में भी कर्मियों की संख्या बढ़ायी जायेगी, पर रेलवे के लिए ऐसी अनुशंसा का न होना ठीक नहीं है. रेलवे की क्षमता और सुरक्षा के मद्देनजर इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. इस मसले में ठेके पर और अस्थायी रूप से कार्यरत लोगों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जिन्हें केंद्र सरकार बड़ी संख्या में निबंधित करती है तथा उन पर 300 करोड़ से अधिक खर्च करती है.
करीब 3.6 करोड़ ऐसे कामगारों में से 32 फीसदी सार्वजनिक क्षेत्र में काम करते हैं. पिछले साल श्रम मंत्रालय ने ऐसे कर्मचारियों के लिए कम-से-कम 10 हजार रुपये वेतन निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा था, जिस पर उद्योग जगत की आपत्ति के बाद कोई प्रगति नहीं हुई है. बीते अक्तूबर में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश में कहा गया था कि सरकारी विभागों में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन दिया जाना चाहिए. बहरहाल, नये कर्मचारियों के आने से सरकार की कार्य क्षमता में वृद्धि होगी और लोगों को बेहतर सेवाएं मिलने में मदद मिलेगी.
यह भी देखा गया है कि अनेक सरकारी विभागों और एजेंसियों में क्रमशः नौकरियां कम हो रही हैं. सरकार को इस संदर्भ में भी संतुलित रवैया अपनाना चाहिए. इस कवायद के साथ युवाओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप काम और कमाई के मौके उपलब्ध कराना भी देश के विकास के लिए जरूरी है.
