ग्रामीण पलायन : एक चुनौती

भारत गांवों का देश कहा जाता है. खुली अर्थव्यवस्था और आधुनिकता के दौर में गांवों को छोड़कर सभी ग्रामीण शहर की ओर अपना रुख कर रहे हैं, जिसका खामियाजा शहर और गांव दोनों को भुगतना पड़ रहा है. गांव से पलायन के दौर में कृषि की स्थिति खराब होती जा रही है. शहर में असीमित […]

भारत गांवों का देश कहा जाता है. खुली अर्थव्यवस्था और आधुनिकता के दौर में गांवों को छोड़कर सभी ग्रामीण शहर की ओर अपना रुख कर रहे हैं, जिसका खामियाजा शहर और गांव दोनों को भुगतना पड़ रहा है. गांव से पलायन के दौर में कृषि की स्थिति खराब होती जा रही है. शहर में असीमित जनसंख्या बढ़ रही है. इसकी वजह से प्रदूषण अत्यधिक फैल रहा है. भारत के बड़े शहरों का आलम यह है कि आदमी कम और गाड़ियां अधिक दिखाई देती हैं.
सबसे बड़ी समस्या खाद्य पदार्थों की बढ़ती कमी है. कृषि की उपज में कमी आ रही है. अगर समय रहते इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो गांव की जमीन बंजर होने में समय नहीं लगेगा. एक समय ऐसा आयेगा जब हमारे पास न तो खाने का अन्न रहेगा न ही पीने काे पानी. इसलिए गांव के लोगों को उनके मुख्यधारा से जोड़े रखना सरकार का मुख्य कर्त्तव्य होना चाहिए.
पवन कुमार दास, सीयूजे, रांची

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