प्रभात खबर के 23/02/17 के अंक में दो भाइयों की खबर काफी प्रेरित करने वाली थी. दोनों भाई मुंबई में अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर गांव आकर बागवानी में लग जाते हैं. आज के परिप्रेक्ष्य में यह खबर और प्रासंगिक हो जाती है. खासकर तब, जब अधिकतर किसान खेतीबाड़ी में मुनाफा न पाकर उसे छोड़ रहे हैं. कोई किसान नहीं चाहता कि उसकी अगली पीढ़ी खेती से जुड़े. किसान भाइयों को चाहिए कि वे खेती के पुराने ढर्रे को छोड़ कर नया रूप अपनायें. उन्हें चाहिये कि खेती को उद्योग की शक्ल दें और उत्पादों का उचित दाम मिलने के लिये बाजार से पहले ही बात तय कर लें. वरना उत्पादक को लागत भी नहीं निकलेगा और उपभोक्ता को ऊंचा दाम चुकाना पड़ेगा.
सीमा साही ,बोकारो
