शनिवार को गृह मंत्रालय की वेबसाइट के हैक करने की कथित घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है. खबरों के मुताबिक, हैंकिंग का पता चलते ही साइट को अस्थायी रूप से बंद कर जांच शुरू कर दी गयी. पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की साइट को हैक कर प्रधानमंत्री और देश के विरुद्ध भद्दी टिप्पणियां लिख दी गयी थीं. सूचना तकनीक शासन-प्रशासन से लेकर आम जन-जीवन के लिए आज बहुत जरूरी हो गयी है और इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. यह इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल लेन-देन तथा कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ने में आधारभूत तत्व है. शेयर बाजार और बैंकिंग सेवाएं भी डिजिटल तकनीक पर निर्भर हैं.
संसद में पिछले सप्ताह गृह मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गयी थी कि 2013 से 2016 के बीच केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न वेबसाइटों को हैक करने की 700 से अधिक घटनाएं सामने आयी थीं. बीते साल ऐसी वारदातों की तादाद 199 रही थी. इस अवधि में गिरफ्तार 8,348 लोगों में से सिर्फ 315 को ही 2014-15 में दोषी ठहराया जा सका है.
ऐसे में साइबर सुरक्षा को मजबूत करना महत्वपूर्ण प्राथमिकता है. इस संबंध में आवश्यक कानूनी सुधार कर त्वरित जांच और सुनवाई की व्यवस्था की जानी चाहिए. अत्याधुनिक होते समय में हमलों के पारंपरिक तौर-तरीके भी बदलते जा रहे हैं. पूरी दुनिया में हैकिंग का इस्तेमाल सूचनाओं की चोरी करने तथा सरकारों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है. भारत में हुई अनेक ऐसी घटनाओं के स्रोत पड़ोसी पाकिस्तान और चीन में होने के पुख्ता सबूत मिले हैं.
वेबसाइटों के साथ सोशल मीडिया के खातों को तबाह करने की साजिशें भी सामने आती रहती हैं. पिछले साल बड़ी संख्या में एटीएम मशीनों को निशाना बनाया गया था. भारत ने कई देशों के साथ साइबर सुरक्षा में सहयोग के लिए समझौता किया है, परंतु सबसे पहले अपने स्तर पर देश की सुरक्षा और वित्तीय तंत्र जैसे संवेदनशील साइटों को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है. साइबर हमले आतंकी हमलों और आर्थिक व वाणिज्यिक फर्जीवाड़े की समस्याओं की तरह ही खतरनाक हैं.
जानकारों ने बार-बार आगाह किया है कि देश के भीतर और बाहर के राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा साइबर तंत्र को निशाना बनाये जाने की घटनाएं भविष्य में तेजी से बढ़ सकती हैं. ऐसे में साइबर सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के साथ सतर्कता बरतने की भी जरूरत है.
