आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के भारत और उसके बाद अमेरिका के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र में विफल करना, चीन की पाकिस्तान परस्ती का एक ज्वलंत उदाहरण है.
पाकिस्तान का साथ देना चीन की विदेश नीति का एक सजीव हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका नुकसान विश्व बिरादरी को उठाना पर रहा है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी हमले निरंतर अंतराल पर होते रहते हैं और उसमें पाकिस्तान का नाम प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ता रहता है.
यदि चीन अपनी अति सक्रिय विदेश नीति को विश्व बिरादरी के भले के लिए समर्पित करे, तो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसका मान और सम्मान बढ़ेगा. चीन को अपनी चेकबुक राजनय से बहार निकल कर देखने की भी जरूरत है, जिससे वह विश्व राजनीति में अपनी जिम्मेदारी को भी समझ सके.
डॉ प्रभात कुमार, जयपुर
