बैंकों में सायरनों की वायरिंग और फिटिंग करने के लिए स्थान के चुनाव में सुरक्षा की रणनीति का ध्यान ही नहीं रखा जाता, जबकि सायरन को लोगों की पहुंच से दूर और दीवार में अंदर की वायरिंग से जोड़कर लगाया जाना चाहिए. इसी कमी का लुटेरे सबसे पहले लाभ उठाते हुए इसे निष्क्रिय करने में सफल हो जाते हैं.
अभी हर जगह ऐसे सायरन खुले नजर आते हैं, जबकि इसे लोहे के बने पिंजरे में लगाया जाना बेहतर होता. आजकल कारों को छू देने से ही उसके सायरन बजने लगते हैं. ऐसी प्रणाली बैंको के सायरनों में लगाये जाने पर इसमें छेड़छाड़ होने पर दूसरा सायरन स्वत: बजने लगेगा. प्रत्येक बैंक में सुरक्षा पर सुझाव/शिकायत पर चर्चा के लिए माह में एक दिन निश्चित करना चाहिए.
लोकेश कुमार, धनबाद
